छींगहाई-तिब्बत पठार में घास बोने से मरुस्थलीकरण क्षेत्रों में सुधार

2019-09-16 14:06:00

पश्चिमी चीन स्थित छींगहाई-तिब्बत पठार पूरी एशिया में महत्वपूर्ण जल स्रोत माना जाता है। जहां चीन और एशिया की महत्वपूर्ण नदी जैसी यांगत्सी नदी, पीली नदी और यालूजांगबू नदी के जन्म क्षेत्र फैलते हैं। लेकिन इस क्षेत्र की पारिस्थितिक स्थितियां नाजुक हैं। कुछ क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण होने का रुझान नजर आया था। इस की रोकथाम करने के लिए चीनी पर्यावरण संरक्षण फाउंडेशन सहित संगठनों ने छींगहाई-तिब्बत पठार पर घास बोने से मरुस्थलीकरण क्षेत्रों में सुधार लाने की कोशिश की है।

तिब्बत स्तवायत्त प्रदेश के शिगात्से शहर की नामलीन काउंटी की ऊँचाई चार हजार मीटर होती है। जहां चीनी पर्यावरण संरक्षण फाउंडेशन ने वर्ष 2016 से मरुस्थलीकरण क्षेत्रों में सुधार लाने की कोशिश शुरू की। इधर के सालों में कुल 16.6 लाख वर्ग मीटर विशाल क्षेत्र में घास और जड़ी-बूटियां बोयी गयी हैं।

कृत्रिम रोपण के माध्यम से मरुस्थलीकरण भूमि का पारिस्थितिक वातावरण बहाल हो गया है। इस काउंटी के उप प्रमुख चांग पो ने कहा कि कृत्रिम तौर पर घास बोने से वनस्पति की कवरेज बढ़ गयी है, हवा और रेत के दिन कम हो गये हैं और लोगों की आर्थिक आय भी बढ़ायी गयी है।

उधर छींगहाई प्रांत के सानच्यांगयुवान क्षेत्र के मातो क्षेत्र में भी मरुस्थलीकरण की समस्या मौजूद है। पर यहां की समस्या है कि कृंतकों के कारण से घास का मैदान धीरे-धीरे निर्जन होता रहा। मातो कस्बे के प्रमुख च्यांगछ्वो ने बताया कि प्रति वर्ग मीटर के घास मैदान में तीन चार माउस छेद फैलते हैं। चूहे घास की जड़ों को भी खाते हैं और भूमि का मरुस्थलीकरण उत्पन्न हुआ है। इसी कारण से मातो कस्बे में 50 से 60 प्रतिशत के क्षेत्र निर्जन हो गये हैं। कृंतकों की रोकथाम के लिए लोगों ने यहां बड़े पैमाने पर जड़ी-बूटियों का रोपण लगाया। जड़ी बूटियों की जड़ें और तने कड़वे होते हैं, जो चूहे के लिए खाना पसंद नहीं है। इसी तरह चूहे के विरूद्ध में कोशिश की जा रही है। कर्मचारियों ने कहा कि यह काम करने से सानच्यांगयुवान क्षेत्र का संरक्षण करने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाली जड़ी बूटियों की फसलें भी उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों ने अपने शोध से यह निष्कर्ष निकाला है कि घास या जड़ी बूटियों के रोपण को पारिस्थितिक प्रभाव के साथ जोड़ना चाहिए। आंकड़े बताते हैं कि 13वीं पंचवर्षीय योजना में छींगहाई प्रांत में तीन लाख हेक्टर मरुस्थलीय क्षेत्र का सुधार किया गया है। सानच्यांगयुवान क्षेत्र में मरुस्थलीकरण की स्थितियों को रोका गया है।

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