भारत में व्यापार कर रहे च्यांग च्येनक्वो की कहानी

2019-10-07 14:32:00

प्राचीन समय से चीनी लोग नाम को बड़ा महत्व देते हैं ।कैसा नाम देना वंश की परंपरा ,संस्कृति ,सामाजिक धारा ,यहां तक कि खगोल और भूगोल से भी संबंधी है ।वर्ष 1949 में नये चीन की स्थापना के बाद बड़ी संख्या में लोगों का नाम च्येन क्वो रखा गया, जिसका अर्थ देश का निर्माण होता है। अब भारत में व्यापार कर रहे च्यांग च्येनक्वो तो उनमें से एक है ।आज नये चीन की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हम आपको उनकी कहानी सुनाएंगे ।

मैं दूर दूर जाता हूं ।जहां पलंग और रज़ाई हो ,वहां मेरा घर है ।कल रेगिस्तान में सर्दी की चिंता थी ,आज मैं गंगा के पास आ गया।

अभी आप ने जो कविता सुनी ,वह च्यांग च्येनक्वो से सुनायी गयी ।च्यांग च्येनक्वो दक्षिण चीन के हू नान प्रांत की हुइ लोंग काउंटी के नागरिक हैं ।चालू साल वे 38 वर्ष के हैं ।उन्होंने भारत में 12 साल बिताए हैं और भारत के दस हजार से अधिक पत्थर सामग्री उद्यमों का दौरा किया है ।अभी कविता में जो वर्णन किया गया है ,भारत में च्यांग च्येनक्वो के भागदौड का प्रतिबिंब है ।

यह कविता च्यांग च्येनक्वो के वीचैट अकाउंट में जारी की गयी ।फिलहाल चाहे बातें लंबी है या छोटी ,च्यांग च्येनक्वो चीनी और अंग्रेजी दोनों भाषा में जारी करते हैं ,क्योंकि वे चाहते हैं कि भारतीय दोस्त भी उनके दिल की आवाज सुन सकते हैं।

वर्तमान में च्यांग च्येनक्वो कहान अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स सेवा कंपनी के संस्थापक और बाज़ार निदेशक हैं ।कंपनी के मुख्यालय अलग अलग तौर पर क्वांग चो और मुंबई में स्थित है ।कंपनी में 20 से अधिक चीनी कर्मचारी और 10 से अधिक भारतीय कर्मचारी ।आप शायद कल्पना नहीं कर सकते कि भारत में बाज़ार का विस्तार कर रहे च्यांग च्येनक्वो तीस साल के पहले हुइ लोंग काउंटी के एक पहाड़ी गांव में सिर्फ एक बाल चरवाहा था।

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