चीन और भारत के बीच संबंधित संवेदनशील मुद्दे के समाधान समय की मांग

2017-02-24 14:14:10

चीन भारत रणनीतिक बातचीत 22 फरवरी को पेइचिंग में आयोजित हुई। उसी दिन चले 7 घंटों तक चली वार्ता में चीनी उप विदेश मंत्री चांग ये श्वे और भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर के प्रतिनिधित्व वाले चीनी और भारतीय पक्ष ने गहन रूप से विचारों का आदान प्रदान किया और व्यापक आम सहमतियां बनाईं। दोनों पक्ष मतभेदों और संवेदनशील मुद्दों के अच्छी तरह निपटारे पर सहमत हुए।

हाल ही में भारतीय मीडिया ने अपेक्षा की कि परमाणु सप्लाई देशों के समूह में भारत की भागीदारी और आतंक विरोधी मुद्दे पर मौजूदा वार्ता सम्मेलन में प्रगति हासिल की जाएगी। इसकी चर्चा में विश्लेषकों ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रणनीतिक बातचीत चीन और भारत के बीच महत्वपूर्ण संपर्क व्यवस्था है, जो गहन रूप से आदान प्रदान करने, मतभेद को कम करने और सहयोग को आगे बढ़ाने का अहम मंच है। लेकिन चीन भारत के बीच मौजूद मतभेदों का हल एक ही बार की रणनीतिक बातचीत में होना संभव नहीं है, इसके लिये दोनों ही पक्षों को निरंतर प्रयासरत रहने की ज़रूरत है।

चीन में भारत मामलों के विशेषज्ञ लोंग शिंगछुन ने कहा कि भारत के पास इससे पूर्व मौजूदा वार्ता सम्मेलन में चीन के साथ एनएसजी में भाग लेने में प्रगति हासिल करने की अपेक्षा थी। लेकिन यह चीन के लिए एक सैद्धांतिक मुद्दा है। चीन के विचार में एनएसजी में भारत की भागीदारी के लिए सर्वप्रथम प्रक्रियात्मक मामलों का समाधान किया जाना जरूरी है। क्योंकि भारत ने इसमें भाग लेने की शर्तों को पूरा नहीं किया है। वह"परमाणु हथियार अप्रसार संधि"यानी एनपीटी पर हस्ताक्षरित देश नहीं है, बल्कि भारत ने"सर्वांगीण परमाणु परीक्षा प्रतिबंध संधि"यानी सीएनटीबीटी प्रभावी होने के बाद परमाणु शक्ति प्राप्त की है। इस तरह एनएसजी में भारत की भागीदारी के लिये एनएसजी के नियमों में संशोधन करने से संबंधित सवाल मौजूद हैं।

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