पर्यावरण जोखिम से हर वर्ष 17 लाख बच्चों की मौत हुई

2017-03-07 18:32:50

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 6 मार्च को जिनेवा में जारी रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण, सेकेंड हैंड धुएं, मैला जल आदि पर्यावरण जोखिम से हर वर्ष 17 लाख पांच वर्ष से कम के बच्चों की मौत हुई। हर वर्ष होने वाले तमाम बच्चों की मौत का कारण खराब पर्यावरण है।

अनवरत दुनिया का विकासबच्चों का स्वास्थ्य व पर्यावरण डेटा नामक रिपोर्ट के अनुसार दस्त, मलेरिया व निमोनिया आदि रोग उन बच्चों, जिनकी उम्र पाँच वर्ष से कम है, की मौत का सामान्य कारण है। लेकिन उक्त रोगों की रोकथाम की जा सकती है। उदाहरण के लिये सुरक्षित पेय जल व भोजन बनाने का साफ़ ईंधन प्राप्त करने से पर्यावरण जोखिम को दूर किया जा सकेगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की महानिदेशक डॉ. मागरेट छन ने कहा कि पर्यावरण का प्रदूषण छोटे बच्चों के प्रति खास खतरनाक है। क्योंकि उन की अंगों और प्रतिरक्षा प्रणाली का विकास हो रहा है, इसलिये गंदा वायु व मैला जल के सामने वे बहुत नाज़ुक हैं।

रिपोर्ट के अनुसार प्रदूषित पर्यावरण भ्रूण पर भी कुप्रभाव डालता है। समय से पहले जन्म देने का जोखिम पैदा होगा। उनके अलावा बच्चे प्रदूषित वायु व सेकेंड हैंड धुएं में रहने से आसानी से निमोनिया से ग्रस्त होंगे। साथ ही वे शायद जिन्दगी भर दमा से पीड़ित होंगे। उन के अलावा वायु के प्रदूषण से बच्चे शायद हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर प्राप्त करने की जोखिम में होंगे।

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