अमेरिका ने क्यों तथाकथित जहाजरानी की मुक्ति की पुरानी बात की

2017-03-12 16:12:55

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में वर्ष 2016 जहाजरानी स्वतंत्रता रिपोर्टर जारी कर चीन पर दक्षिण चीन सागर में ज्यादा समुद्री अधिकार मांगने औऱ जहाजरानी स्वतंत्रता पर प्रभाव डालने का आरोप लगाया। ऐसी बातें करने का मतलब प्रभुसत्ता और समुद्री अधिकार को चुनौती देना है। चीन द्वारा समुद्री भूमि के रेखांकित करने के आधार बिन्दु का मापदंड संयुक्त राष्ट्र महासागर और समुद्री समझौते के नियमों से मेल खाता है। दक्षिणी चीन सागर में पहले और वर्तमान में संबंधित कानून का पालन करने वाले किसी भी जहाज़ की जहाजरानी स्वतंत्रता चीन के द्वारा बाधित नहीं की गई है और भविष्य में ऐसी बात भी होगी भी नहीं।


चीन ने किसी भी देश की किसी भी कानूनी जहाज की समुद्र में जाने की स्वतंत्रता को बाधित नहीं किया। चीन ने बहुत सारे पैसे खर्च करके पांच मानव निर्मित द्वीपर पर लाइट हाउस बनाया है, जो चीन द्वारा दक्षिणी चीन सागर में जहाजरानी की स्वतंत्रता के लिए दिया गया योगदान  है। ये लाइट हाउस न सिर्फ चीनी जहाज बल्कि अन्य देशों के जहाजों के लिए मार्गदर्शन करते हैं।


वर्ष 1979 में अमेरिका द्वारा जहाजरानी स्वतंत्रता योजना बनाए जाने से वह अपने शक्तिशाली नौसेना का सहारा लेकर दूसरे देशों की प्रभुसत्ता और समुद्री अधिकार को चुनौती देता है। स्वतंत्र जहाजरानी दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने का बहाना है।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय हर साल तथाकथित स्वतंत्र जहाजरानी का मुद्दा उठाकर चीन की प्रभुसत्ता को चुनौती देता है। इस साल की रिपोर्ट में पुरानी बातें फिऱ दोहरायी गयी हैं, जिसका उद्देश्य चीन को नियंत्रित करने की नीति जारी रखना है। अमेरिकी प्रभुत्व का कमजोर होना सर्वमान्य बात है। अपने मित्र देशों में उत्साह भरने और प्रतिद्वंद्वी को ललकारने के लिए अमेरिका दक्षिणी चीन सागर में छेड़छाड़ कर रहा है और दिखाना चाहता है कि उसके प्रभुत्व का आधार कमजोर नहीं हुआ है।   

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