विकास की राह पर तिब्बत

2017-03-23 18:11:16

23 मार्च को पेइचिंग में तिब्बत पर एक सांस्कृतिक विषय पर एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया जिसमें देसी विदेशी संवादाता मौजूद थे जिनमें प्रमखु रूप से चंग तुई - चीनी तिब्बत अध्ययन केन्द्र के महानिदेशक, लियेन सियांग मिन - समकालीन अध्ययन विभाग के प्रधान, चऊ वेई -धार्मिक अध्ययन विभाग के प्रधान, चुंग ग च्या - तिब्बती औषधि अध्ययन के उप प्रधान, चा च्या - तिब्बती संस्कृति संग्रहालय के उप प्रधान, केलसांग ड्रोलमा - सामाजिक अर्थतंत्र विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

इस दौरान प्रेस वार्ता को संबोधित करने वाले तिब्बत के विभिन्न विषय के कई जानकार गणमान्य विशेषज्ञ मौजूद थे, 1951 के बाद से अबतक तिब्बत के विभिन्न क्षेत्रों में जो तरक्की का काम किया गया है उस पर इन विशेषज्ञों ने संवादाताओं के सवालों के जवाब दिये।

शिक्षा के क्षेत्र में आज तिब्बत की स्थिति 1951 की तुलना में बहुत अलग है, आज वहां 99 फीसदी लोग शिक्षित हैं, जिन्हें प्राइमरी, माध्यमिक और वोकेशनल शिक्षा दी जा रही है, भाषा को लेकर भी वहां पर कोई मतभेद नहीं हैं, भाषा विशेषज्ञ ने बताया कि तिब्बत में तिब्बती और चीनी के अलावा भी कई दूसरी भाषाएं वहां पर बोली जाती हैं, इस स्थिति पर चीन की स्थिति एकदम साफ है, वर्ष 2000 से ही कई विदेशी विशेषज्ञों ने तिब्बत जाकर वहां की स्थिति का जायज़ा भी लिया है।

सीटीआरसी ( चाइना तिब्बतोलॉजी रिसर्च सेंटर) ने ऑस्ट्रिया, इटली, जापान और अमेरिका से विशेषज्ञों का आदान-प्रदान भी किया है जो भाषा पर शोध कर रहे हैं, साथ ही वर्ष 2004 से पोताला महल से संस्कृत भाषा में सुरक्षित रखी गई प्राचीन पाण्डुलिपियों का अध्ययन कई देसी विदेशी विशेषज्ञ मिलकर कर रहे हैं, इसके साथ ही तिब्बत में बोली जाने वाली कई और भाषाओं पर भी विशेषज्ञों का आदान-प्रदान होता है। इसके साथ ही जलडमरू मध्य के तट पर थाईवान के विशेषज्ञों के साथ भी आदान-प्रदान किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तिब्बत में दिनों दिन बेहतर होती जा रही हैं। तिब्बती लोगों का स्वास्थ्य बीमा भी करवाया जा रहा है। पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा और औषधि पद्धति की मांग बढ़ती जा रही है, तिब्बती दवा निर्माता कंपनी विदेशों में भी जड़ी बूटियां उगा रही है। जर्मनी, रूस और स्पेन में तिब्बती चिकित्सा और औषधि पद्धति का अनुवाद हुआ है और इन देशों के चिकित्सकों के सहयोग से तिब्बती चिकित्सा में शोध किया जा रहा है और इसकी शिक्षा स्थानीय डॉक्टरों को भी दी जा रही है।

पूरे तिब्बत में 46 हज़ार बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणियां 17 सौ मठों में रहते हैं जिनकी रहन सहन, शिक्षा और चिकित्सा की सारी ज़रूरतें चीन की केन्द्रीय सरकार पूरी करती है, साथ ही उन्हें रहन सहन के लिये सरकार की तरफ़ से भत्ता भी दिया जाता है। पूरे चीन में करीब डेढ़ लाख बौद्ध भिक्षु भिक्षुणियां देशभर में फैले तीन हज़ार पांच सौ मठों में रहते हैं, और अपने जीवन-यापन के लिये उन्होंने बौद्ध मंदिरों में प्रवेश शुल्क लगाने के साथ दुकानें खोलना और बौद्ध धर्म से संबंधित सामग्री बेचना भी शुरु किया है। इस सारे विषयों पर जानकारी मिलने के बाद ये बात तय हो जाती है कि आज का तिब्बत बदल रहा है, बेहतरी के लिये, विकास के लिये और चीन के बाकी क्षेत्रों की तरह तरक्की के लिये।

पंकज श्रीवास्तव

कैलेंडर

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