दलाई लामा का चीन को विभाजित करने का रुख नहीं बदला है

2017-03-24 16:09:09

23 मार्च को पेइचिंग में चीनी राष्ट्र पत्रकार संघ द्वारा आयोजित तिब्बती संस्कृति संरक्षण संगोष्ठी में उपस्थित चीनी तिब्बती अनुसंधान केंद्र के आधुनिक विभाग के प्रधान ल्यैन श्यांग मीन ने भारतीय संवाददाता के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि चीन और भारत पड़ोसी देश हैं । दोनों देशों को एक दूसरे की प्रभुसत्ता का समादर करना चाहिये।

ल्यैन श्यांग मीन ने कहा कि दलाई लामा के मध्यम मार्ग का केंद्र यही है कि तिब्बत को चीन से अलग किया जाएगा । दलाई लामा के मध्यम मार्ग का उसके देश को विभाजित करने वाली कोशिशों के बीच कोई फर्क नहीं है । चीन सरकार का सतत रुख है यानी दलाई लामा को तिब्बती स्वाधीनता को त्यागना होगा, देश को विभाजित करने वाली गतिविधियों को खत्म करना होगा और तिब्बत और थाइवान चीन की प्रादेशिक भूमि का अखंडनीय भाग होने का स्वीकार करना होगा ।

ल्यैन श्यांग मीन ने कहा कि केंद्र सरकार ने सन 1980 के दशक से दलाई लामा के निजी प्रतिनिधियों के साथ दो दौर की वार्ता की थी । वास्तव में केंद्र सरकार और विदेशों में रहने वाले तिब्बतियों के बीच संपर्क रखने का रास्ता हमेशा खुला है । लेकिन तथाकथित तिब्बती निर्वासित सरकार बिल्कुल अवैध संगठन है । उसे केंद्रीय सरकार के साथ बातचीत करने का अधिकार नहीं है । दलाई लामा के स्वदेश लौटने की संभावना मौजूद है बशर्ते कि वह तिब्बती जनता के रुख पर वापस लौट आए।

( हूमिन )

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