मुंबई के पर्यवेक्षक फाउंडेशन की “एक पट्टी एक मार्ग” संगोष्ठी में भारत स्थित चीनी मिनिस्टर का भाषण

2017-04-23 16:07:20

21 अप्रैल को आयोजित मुंबई के पर्यवेक्षक फाउंडेशन की "एक पट्टी एक मार्ग" संगोष्ठी में भारत स्थित चीनी दूतावास के मिनिस्टर ल्यू चिन सोंग ने भाषण दिया।

ल्यू ने कहा कि हाल ही में भारतीय मीडिया, विद्वानों और थिंक टैंक ने चीन द्वारा प्रस्तुत "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव पर अधिकाधिक ध्यान दिया। इस स्थिति में उन्होंने छह पहलुओं से "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव पर अपनी राय पेश की। पहला, इतिहास और संस्कृति की दृष्टि से देखा जाए, तो भारत हमेशा से सिल्क रोड पर स्थित है। दूसरा, वास्तविक स्थिति से देखा जाए, तो भारत ने "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव से घनिष्ठ संबंध स्थापित किया। तीसरा, "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव में एक ठोस पट्टी और एक ठोस मार्ग नहीं है, यह वैश्विक महत्व वाले क्षेत्रीय सहयोग का नेटवर्क और सिस्टम इंजीनियरिंग है। चौथा, "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव कई वर्षों से संचय की गई सौ साल की एक बड़ी योजना है, जो चीन और इससे संबंधित देशों को लाभ मिल सकती है। पांचवां, चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक गलियारा भारत की प्रादेशिक संप्रभुता की मांग पर कोई प्रभाव नहीं डालती और दीर्घावधि में देखा जाए, तो यह भारत और दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों के लिए लाभदायक है। छठा, चीन और भारत "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव से संबंधित सहयोग जोड़ सकते हैं और समान रूप से एशिया की सदी का निर्माण कर सकते हैं।

ल्यू ने कहा कि चीन एक बड़ा जिम्मेदार देश है। अपने विकास के साथ चीन पड़ोसी देशों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की और अधिक सार्वजनिक सेवा करना चाहता है और चीन के विकास के एक्सप्रेस ट्रेन पर जाने के लिए विभिन्न पक्षों का स्वागत करता है। पिछले तीन वर्षों में चीन ने "एक पट्टी एक मार्ग" से संबंधित देशों को 50 अरब अमेरिकी डॉलर का पूंजी निवेश किया, कई  परियोजनाएं शुरू कीं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि "एक पट्टी एक मार्ग" चीन के एक प्रस्ताव के बजाए एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यसूची और बहुपक्षीय कार्रवाई भी है। "एक पट्टी एक मार्ग" मंच पर सिलसिलेवार सहयोग के नए स्वरूप और नई परियोजनाएं की जा रही है। अगर जल्दी इसमें भाग लेगा, तो जल्द ही लाभ भी मिलेगा।

(वनिता)

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