सीमा विवाद पर चीनी राजदूत लो चाओ ह्वेई का पीटीआई से इंटरव्यू

2017-07-05 16:30:07

भारत स्थित चीनी राजदूत लो चाओ ह्वेई ने 4 जुलाई को पीटीआई को इंटरव्यू दिया और भारतीय सेना के सीमा पार की घटना के प्रश्नों के उत्तर दिये ।

तूंगलांग क्षेत्र की स्थितियों की चर्चा करते हुए लो चाओ ह्वेई ने कहा कि इस क्षेत्र की स्थिति गंभीर है । मुझे बेहद चिन्ता है । यह पहली बार है कि भारतीय सेना ने चीन-भारत सीमा के निश्चित भाग को पार कर चीन की प्रादेशिक भूमि में प्रवेश किया है । इससे हालिया 19 दिनों के लिए दोनों सेनाओं के बीच गतिरोध पैदा होने की स्थितियों में ढील नहीं हो बरती गई ।

लो चाओ ह्वेई ने कहा कि मैं तीस से अधिक सालों तक चीन-भारत संबंधों से जुड़ा काम कर चुका हूं । लेकिन मेरी याद में यह चीन-भारत सीमा के सिक्किम भाग पर पहली बार ऐसी गंभीर घटना घटित हुई है । क्योंकि वहां की सीमा निश्चित सीमा ही है । सीमा का रेखांकन भी स्पष्ट है । दोनों पक्षों के बीच सहमति हुई और इस क्षेत्र में हमेशा शांति बनी रही है । भारतीय सेना द्वारा जो सीमा पार कर कदम उठाया गया है, वह पहले के अनिश्चित सीमांत क्षेत्रों में हुए टकराव से बिल्कुल अलग है ।

लो चाओ ह्वेई ने कहा कि सन 1890 में संपन्न “चीन और ब्रिटेन के बीच तिब्बत-भारत संधि” के मुताबिक भी कोई शक नहीं कि तूंगलांग क्षेत्र चीनी प्रादेशिक भूमि ही है । भारत की सरकारों ने अनेक बार लिखित रूप में इसकी पुष्टि की है यानी दोनों पक्षों के बीच सीमा के सिक्किम भाग की रेखांकन के प्रति कोई मतभेद नहीं है । यह संधि सिक्किम की मौजूदा स्थिति के स्वीकार करने का आधार है । चीन ने इसी आधार पर भारतीय श्रद्धालुओं के लिए नाथूला दर्रा खोला है । चीन का रुख है कि चीन-भारत सीमा के विवाद क्षेत्रों में सिक्किम भाग शामिल नहीं है । यहां तक कि सन 1962 में ही इस भाग में शांति बनी रही थी । लेकिन अब भारत ने यह पेश किया है कि चीन-भारत सीमा का सिक्किम भाग तय नहीं है जिससे न सिर्फ ऐतिहासिक संधि का उल्लंघन किया गया है बल्कि सीमांत क्षेत्र के नियंत्रण तथा द्विपक्षीय संबंधों को अधिक छिपे खतरे पैदा किये जाएंगे ।

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