चीनः भारतीय सेना की सीमा पार घटना पर रुख संबंधी दस्तावेज का मकसद चीन के रुख का व्याख्यान

2017-08-02 18:22:21

2 अगस्त को चीनी विदेश मंत्रालय ने भारतीय सीमा टुकड़ी के चीन-भारत सीमा के सिक्किम भाग में चीन की प्रादेशिक भूमि में घुसने के तथ्य और चीन के रुख संबंधी दस्तावेज जारी किया और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष इस बार भारतीय सेना की सीमा पार घटना के तथ्य का प्रकाश डाला और चीन सरकार के रुख का व्याख्यान किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गंग श्वांग ने कहा कि चीन ने अपने देश की प्रादेशिक प्रभुसत्ता की रक्षा करने, अंतर्राष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांत और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों की रक्षा करने और न्याय व निष्पक्षता की रक्षा करने के लिए यह दस्तावेज जारी किया है। चीन को विश्वास है कि हर चीज़ का तथ्य होता है। सब लोग इसे देख सकते हैं।

क्यों चीन ने अब इसे रुख दस्तावेज जारी किया? इसकी चर्चा में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गंग श्वांग ने कहा कि 18 जून को भारतीय सीमा टुकड़ी ने चीन-भारत सीमा के सिक्किम भाग से चीनी प्रादेशिक भूमि में प्रवेश किया। अभी तक भारतीय सेना चीन की प्रादेशिक भूमि पर गैरकानूनी रूप से ठहरी रही है। इस घटना के बाद चीन ने राजनयिक माध्यम से कई बार भारतीय पक्ष के समक्ष गंभीर मामला उठाया और भारतीय पक्ष के गैरकानूनी सीमा पार कार्यवाइयों की कड़ी निंदा की। चीन ने भारत से ऐतिहासिक संधि का पालन कर तुरंत निःशर्त अपनी सेना को सीमा के भारतीय पक्ष में वापस हटाने की मांग की। चीन ने बड़ा संयम रखा है। लेकिन भारत ने यथार्थ कार्यवाई नहीं की, इस के बावजूद विभिन्न कारणों से भारतीय सेना के गैरकानूनी सीमा पार कार्यवाई के लिए बहाने बनाए।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गंग श्वांग ने कहा कि चीन-भारत सीमा का सिक्किम भाग 1890 में चीन-ब्रिटेन सम्मेलन की तिब्बत-भारत संधि से रेखांकित किया जा चुका है। यह चाम व भारत सरकार द्वारा पुष्टि की गयी निश्चित सीमा है, जो तथ्य रहा है। भारत की कार्यवाई ने 1890 संधि और चीन-भारत निश्चित सीमा का उल्लंघन किया है, अंतर्राष्ट्रीय बुनियादी सिद्धांत और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मापदंड का उल्लंघन किया है। यह न सिर्फ चीनी प्रादेशिक भूमि की प्रभुसत्ता का गंभीर आक्रमण है, बल्कि क्षेत्रीय शांति व स्थिरता और सामान्य अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की गंभीर चुनौती भी है। कोई भी प्रभुसत्ता संपन्न देश इसे सहन नहीं कर सकता है।



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