चीन-भारत संबंधों में “मीडिया का फंक्शन”

2017-08-16 14:04:35

भारत में मीडिया अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । यह बात भी सुनने को मिलती है कि भारत में सरकार नहीं, मीडिया ही फैसला कर लेता है । इसके बारे में चाइना रेडियो इंटरनेशनल के टिप्पणीकार अपने कार्यक्रम में कुछ बता रहे हैं । 

सपना – यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है । सभी श्रोताओं को सपना की नमस्ते ।

हू – और हूमिन की तरफ से भी नमस्कार ।

सपना – हू साहब, पिछले हफ्ते आप ने चीन और भारत के संबंधों में जो"लैंग्वेज प्रॉब्लम"के बारे में चर्चा की थी, उस पर हमारे श्रोताओं की तरफ से बहुत-सी प्रतिक्रियाएं आयी हैं । बहुत से दोस्तों ने हमें पत्र या संदेश भेजकर अपने विचार प्रकट किये और वे इससे सहमत हैं कि चीन और भारत को पारस्परिक समझ को बढ़ावा देना चाहिए और आपस में गलतफहमियों को हटाने की कोशिश करनी पड़ेगी ।

हू – जी । चीन और भारत के संबंधों में पारस्परिक समझ और पारस्परिक विश्वास के बारे में गंभीर "घाटा" मौजूद है । दोनों देशों, और दोनों देशों की जनता के बीच में अधिक समझ और विश्वास बिठाना चाहिये । लेकिन इसी संदर्भ में मीडिया कुंजीभूत भूमिका निभाता है । क्योंकि मीडिया दोनों देशों के बीच पुल जैसा होता है, और यह भी कहता है कि कभी-कभी देश का फैसला मीडिया ही द्वारा लिया जाता है ।


सपना – मीडिया क्या फैसला ले सकता है?मीडिया लोगों की जानकारियों का संचरण करता है न?और मीडिया इसी शब्द का मतलब भी है दोनों पहलुओं के बीच में सूचना भेजने का साधन । मीडिया वास्तव में पुल या सेतु ही है । क्या यह ठीक है न?

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