चीन-भारत संबंधों में गलतफ़हमियों के बादल छंटने चाहिये

2017-09-11 19:21:00

चीन और भारत के बीच संबंधों में कभी कभार जो तनाव पैदा होता है उन सभी के पीछे गलतफ़हमियों का बादल नज़र आता है । बादल के छंट जाने से चीन-भारत संबंधों के विकास का समतल रास्ता प्रशस्त हो जाएगा । आइये सुनिये चाइना रेडियो इंटरनेशनल के टिप्पणीकार का विश्लेषण ।

सपना – यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है । सभी श्रोताओं को सपना की नमस्ते ।

हू – सभी श्रोता दोस्तो को हूमिन की भी नमस्ते ।

सपना – हू साहब, हम देख रहे हैं कि चीन और भारत के बीच संबंधों के विकास में कभी-कभी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है । हम अपने कार्यक्र्म में“लैंग्वेज प्रॉब्लम”और दोनों देशों की संस्कृति में “फेस” व “आत्मसम्मान” का विश्लेषण भी कर चुके हैं । लेकिन ऐसे तत्व चीन और अन्य देशों के बीच संबंधों में भी मौजूद हैं । आपके विचार में चीन-भारत संबंधों में सही समझ संपन्न न होने का कारण वास्तव में क्या है ?

हू – जी । चीन और भारत दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश हैं और उनकी संस्कृति भी सबसे ज्यादा पुरानी है । सुना है कि लम्बा इतिहास संपन्न देशों में रहने वाले लोगों के विचार भी दूसरों से अधिक गहरे होते हैं । शायद इसी कारण से चीन और भारत के लोगों के लिए पारस्परिक समझ भी अधिक मुश्किल है ।

सपना – जी हां । मैंने अनेक बार भारत का दौरा किया है और वहां बहुत से लोगों से संपर्क किया है । मुझे लगता है कि दोनों देशों के लोगों के रहन-सहन में बहुत फर्क मौजूद है । उनमें एक मिसाल है खाद्य पदार्थ । चीनी लोग शायद ज्यादा मांस खाते हैं, जबकि वहां पर लोगों को मसाला बहुत पसंद है, जो विदेशियों के लिए आदत नहीं है ।

हू – जी बिल्कुल । खाना खाने की आदत किसी जाति के जीवन के पर्यावरण से संबंधित है । मिसाल के तौर पर चीन और यूरोप के लोगों को पोर्क और बीफ़ खाने की आदत है, जबकि विश्व में कुछ दूसरे लोगों के लिए ऐसा मांस खाने की पाबंदी है । लेकिन जो ये मांस नहीं खाते हैं, उन्हें दूसरों पर भी ऐसी पाबंदी लगाने के लिए विवश नहीं करना चाहिये । अपनी आदत को दूसरों पर थोपना सही नहीं है। अलग खाना खाने के कारण से दूसरे लोगों को गलत समझना या निम्म समझना, कतई सही नहीं है ।

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