कुपोषण और यक्ष्मा भारत में स्वास्थ्य के लिये सबसे बड़े खतरे

2017-10-03 18:16:00

अब कुपोषण और यक्ष्मा भारत में लोगों के स्वास्थ्य के लिये सबसे बड़ा खतरा बने हैं। इंडिया टाइम्स ने हाल ही में अमेरिकी वॉशिंग्टन विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य सांख्यिकीय मूल्यांकन अनुसंधान प्रतिष्ठान द्वारा जारी आंकड़ों के हवाले से कहा कि इस समय भारत की कुल जनसंख्या के 46 प्रतिशत लोग कुपोषण से ग्रस्त हैं और 39 प्रतिशत लोग यक्ष्मा से पीड़ित हैं।

इन आंकड़ों के अनुसार भारत में 60 करोड़ से अधिक लोग प्रोटीन और विटामिन के अभाव से कुपोषण ग्रस्त हैं। वे आसानी से नींद और थकान महसूस करने लगते हैं, कमजोर हैं और ध्यान से काम नहीं कर पाते। अगर बच्चे कुपोषित हैं, तो उनके शारीरिक विकास पर बुरा असर होगा। ज्यादा पोषण लेने से ऐसी स्थिति में सुधार किया जा सकेगा। लेकिन बीते दस वर्षों में कुपोषण का अनुपात भारत में 8 प्रतिशत अधिक रहा।

आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 52 करोड़ लोग यक्ष्मा से प्रभावित हैं। बीते दस वर्षों में हालांकि भारत में यक्ष्मा से मारे गए लोगों की संख्या कम हुई है, लेकिन यक्ष्मा ग्रस्त लोगों की संख्या 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। वर्तमान में 8 करोड़ से ज्यादा भारतीय इस रोग से ग्रस्त हैं।

उन के अलावा भारत में कार्डियोवास्कुलर और मधुमेह के रोगियों की संख्या क्रमशः 5.5 करोड़ और 6.5 करोड़ तक पहुंच गयी है।

चंद्रिमा

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