प्रदूषित नदियों से जूझता भारत

2017-10-04 19:06:00

भारत में नदियों को जीवन दायिनी कहा गया है, प्राचीन समय में नदियों के किनारे कई शहर और सभ्यताएं बसीं, आज भी कई बड़े शहर नदियों के किनारे ही बसे हैं। पिछले दो दशकों में नदियों का इतना दोहन किया गया है कि अब पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ गया है। आज सारी नदियां प्रदूषित और पानी की कमी से जूझ रही हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञ दिलीप बोस ने बताया कि अबतक की सभी सरकारें इस मुद्दे पर पूरी तरह असफल रही हैं जिससे हालात बदतर हो चुके हैं।

2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से भावनात्मक तौर पर नदियों की सुरक्षा की अपील की, जिससे गंगा जैसी पवित्र नदियों को उनका दर्जा दिया जाए।

लंबे समय से उमा भारती गंगा बचाने की मुहिम से जुड़ी रही हैं, इस समय ये जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। सरकार ने कई कदम उठाने की बात भी कही, जिसमें नदियों में कचरा न फेंकने का आग्रह शामिल था, जल शोधन यंत्र लगाने की बात कही गई।

वर्ष 2014 में सरकार के लिये गंगा सफाई अभियान बहुत बड़ी चुनौती थी, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक एस के जयराम ने बताया गंगा सफाई अभियान तीस वर्ष पुराना है बावजूद इसके देश की दो बड़ी नदियों की मौत हो गई।

नदियों की सफाई अभियान के लिये काम शुरु करने वाले के के दासगुप्ता ने बताया कि सरकार निजी भागीदारी, बैंक लोन, परियोजना बनाने जैसे कदम उठा रही है जिससे नदियों को साफ किया जा सके। इसके लिये सरकार ने नामचीन लोगों, फिल्मी सितारों का सहारा भी लिया जिससे लोगों में नदियों को प्रदूषित ना करने की जागरूकता बढ़े, साथ ही स्कूल विद्यार्थियों में भी जागरूकता अभियान चलाया गया।

मध्य प्रदेश और गुजरात सरकारों ने क्रमश: नर्मदा और साबरमती नदियों के लिये अभियान चलाकर और सरकारी मदद से इन्हें फिर से जीवन प्रदान किया है। ऐसा ही कुछ बाकी नदियों के लिये भी किया जाना चाहिए।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस बार सरकार ने नदियों के लिये जो कदम उठाए हैं उनकी ससय सीमा नहीं बढ़ाई जानी चाहिए, काम करने की गति को तेज़ी देनी चाहिए, इतना करने के बाद भी हमें जल्दी परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि नदियों की सफ़ाई में समय लगता है।

पंकज

कैलेंडर

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