चीन-भारत संबंध : उभय जीत वाले संबंध कायम करना ही एकमात्र रास्ता

2017-10-16 09:23:05

चीन और भारत के बीच उभय जीत वाले संबंध कायम करना ही एकमात्र सही रास्ता है और ऐसा क्यों चलता है आइये सुनिये चाइना रेडियो इंटरनेशनल के टिप्पणीकार का विश्लेषण।

सपना – यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है। सभी श्रोताओं को सपना की नमस्ते।

हू – और सभी श्रोता दोस्तों को हूमिन का भी नमस्कार।

सपना – हू साहब, मैं जानती हूं कि आप ने चीन और भारत दोनों देशों की संस्कृति के बारे में बहुत कुछ पढ़ा है और इसीलिए चीन-भारत संबंधों के बारे में आप बहुत जानकारी रखते हैं। आपसे सीखते हुए मैंने हाल ही में भी चीन और भारत की परंपरागत संस्कृतियों से संबंधित ग्रंथों का अध्ययन करना शुरू किया है।

हू – आप ने कौन सा ग्रंथ पढ़ा है ?

सपना – कन्फ्यूशियस के “द एनेलिट्स”, और भारत के दो महाकाव्य, रामायण और महाभारत इत्यादि । पर आपने हाल के दिनों में क्या-क्या पढ़ा है ?

हू – मैं तो सिर्फ़ कुछ लोककथा पढ़ रहा हूं ।

सपना – लोककथा ?आप ?क्यों ?

हू – क्योंकि मेरा ख्याल है कि या प्राचीन काल के ग्रंथ, या लोक कथाएं या परियों की कहानियां, यह सब मानव ज्ञान का संग्रह है । हम इन्हें पढ़ने से अपनी बुद्धि का विस्तार कर सकते हैं ।

सपना – बताइये ।

हू – मिसाल के तौर पर आजकल मैंने अंधे आदमियों और हाथी की कहानी पढ़ी। इसमें बताया गया है कि कुछ अंधे आदमी अपने हाथों से टटोलते हुए हाथी की पहचान करते हैं। हर एक ने हाथी के जिस अंग को छूआ उस अंग को ही पूरा हाथी समझा। जिसने हाथी के शरीर का स्पर्श किया तो उसने बताया हाथी दीवार का जैसा है। जिसने हाथी के पैर को छुआ तो कहा हाथी एक स्तंभ है। और जिसने हाथी की सूंड को पकड़ा तो कहा हाथी एक नली ही है।

सपना – अच्छा, यह कहानी हमें बचपन में ही पढ़ाई गई थी। लेकिन इसमें जो तर्क है, वह सोचने योग्य है । इस कहानी का मतलब है कि आधे सच को पूरा सच नहीं समझना चाहिये, या कहते हैं कि आंशिक भाग के अनुभव से सारा निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। लेकिन वास्तव में बहुत से आदमी ऐसी गलतियां करते रहे हैं।

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