चीन-भारत संबंध: मिडिल क्लास की भूमिका

2017-11-20 09:10:01

मिडिल क्लास हमेशा समाज में कुंजीभूत भूमिका निभाता है और आइये सुनिये इस सवाल को लेकर चाइना रेडियो इंटरनेशनल के टिप्पणीकार का विश्लेषण।

सपना – यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है। सभी श्रोताओं को सपना की नमस्ते।

हू – और सभी श्रोता दोस्तों को हूमिन का भी नमस्कार।

सपना – हू साहब, हाल में चीनी नेता ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस में जो रिपोर्ट पेश की है उसमें एक वाक्य ने मेरा ध्यान खींचा है, यानी चीन अपने समाज में मध्यम-आय वाले समूहों का विस्तार करेगा। यहां मध्यम-आय वाले समूहों का मतलब है मिडिल क्लास ही है। मेरे ख्याल से मिडिल क्लास किसी भी समाज में कुंजीभूत भूमिका निभाता है और मिडिल क्लास के अनुपात से एक देश का विकास स्तर जाहिर होता है। इधर के वर्षों में चीन और भारत में मिडिल क्लास की संख्या लगातार बढ़ती रही है जिसने इस देश के विकास और प्रगति को साबित किया है।

हू – जी हां, आपने सही कहा । मिडिल क्लास की विभिन्न देशों के अलग अलग काल में परिभाषा भी अलग होती है। लेकिन मैं आप की इस बात से सहमत हूं कि मिडिल क्लास हमेशा देश में कुंजीभूत भूमिका निभाता है। क्योंकि ये मिडिल क्लास, आम तौर पर वो शिक्षित आदमी है, जो सरकारी संस्थान, सेना, शिक्षालय, वैधानिक विभाग और खासकर मीडिया में नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं। हम यह भी कह सकते हैं कि मिडिल क्लास किसी भी देश की रीढ़ होता है।

सपना – हम जानते हैं कि चीन और भारत मुख्य रूप से कृषि प्रधान देश माने जाते हैं, जिनकी जनसंख्या का अधिकांश भाग देहातों में रहता है। लेकिन इधर के वर्षों में इन दोनों देशों के समाज में भारी परिवर्तन आया है। मिडिल क्लास की शक्ति शीघ्र ही बढ़ती जा रही है। जैसे चीन के शहरों में बहुत से लोगों ने अपनी कारें और मकान खरीदे हैं, काम पर आते जाते समय अपने वाहन का इस्तेमाल करते हैं, और हमारे ऑफिस में युवा लोग कभी-कभार पर्यटन के लिये विदेश जाते हैं। उधर भारत में भी आर्थिक विकास के चलते लोगों के जीवन में उल्लेखनीय सुधार नज़र आ रहा है। भारतीय अखबारों में भी यह खबर आई कि भारत में मिडिल क्लास की संख्या तीस करोड़ ही तक जा पहुंची है।

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