चीन-भारत संबंध : "बेल्ट एंड रोड" पर फिर से फोकस

2017-11-28 14:34:02

19वीं सीपीसी कांग्रेस के बाद "बेल्ट एंड रोड" पर फिर से लोकमत का फोकस बना है और आइये सुनिये इस सवाल को लेकर चाइना रेडियो इंटरनेशनल के टिप्पणीकार का विश्लेषण।

सपना – यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है। सभी श्रोताओं को सपना की नमस्ते।

हू – और सभी श्रोता दोस्तों को हूमिन का भी नमस्कार।

सपना – हू साहब, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 19वीं राष्ट्रीय कांग्रेस में महासचिव शी चिनफिंग ने अपनी रिपोर्ट में "एक पट्टी एक मार्ग" यानी "बेल्ट एंड रोड" की चर्चा करते हुए कहा कि चीन "बेल्ट एंड रोड" के सहयोग को सक्रियता से आगे बढ़ाएगा और अंतर्राष्ट्रीय इंटरकनेक्शन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक नया मंच स्थापित करेगा । बेशक है कि चीन दीर्घकाल तक "बेल्ट एंड रोड" को बढ़ाने का प्रयास करेगा । लेकिन हम यह भी देखते हैं कि भारत में "बेल्ट एंड रोड" को हमेशा से संदेह की आवाज़ सुनती जा रही है, ऐसा क्यों है?

हू – जी । चीनी नेता ने वर्ष 2013 के सितंबर में प्रथम बार "बेल्ट एंड रोड" पहल प्रस्तुत किया जिसके मुख्य मुद्दे हैं यानी कि बुनियादी उपकरण, व्यापार, पूंजीनिवेश आदि इंटरकनेक्शन से पूर्वी एशिया से पश्चिमी यूरोप तक के विशाल क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंच का निर्माण किया जाएगा । "बेल्ट एंड रोड" प्राचीन काल के सिल्क रोड और समुद्रीय रेशम मार्ग के रूट से मेल खाता है, इसी से यह नाम आता है । पता चला है कि "बेल्ट एंड रोड" के तट पर स्थित दर्जनों देशों के कुल 4 अरब 40 करोड़ जनसंख्या है और इनमें बहुत से विकासमान देशों का बुनियादी उपकरण पिछड़ा हुआ है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि "बेल्ट एंड रोड" अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का विकास करने का बहुत सकारात्मक अर्थ प्राप्त है।

सपना – जी हां । वर्ष 2013 में यह पहल प्रस्तुत करने से अभी तक "बेल्ट एंड रोड" का विश्व में व्यापक समर्थन प्राप्त हो चुका है । और चीन ने "बेल्ट एंड रोड" के तटस्थ देशों के साथ सौ से अधिक सहयोग समझौते संपन्न किये हैं जो सभी पक्षों को लाभ मिलता है । मैं इसी पॉइंट पर उलझन में पड़ गयी हूं, वो ये है कि "बेल्ट एंड रोड" एक बिल्कुल अच्छी पहल है जो सभी देशों के लिए लाभदायक है। लेकिन भारत में लोग इसका क्यों विरोध करते हैं?

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