6वीं चीन - मध्य व पूर्वी यूरोपीय देश वार्ता आयोजित

2017-11-28 16:07:02

6वीं चीन - मध्य व पूर्वी यूरोपीय देश वार्ता 27 नवम्बर को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में आयोजित हुई । दोनों पक्षों ने बीते पाँच सालों के सहयोग के आधार पर नये दौर की सहयोग रूपरेखा बनायी है और एक पट्टी एक मार्ग के निर्माण में अधिक सहयोग पर भी सहमति संपन्न की है ।

वर्ष 2012 में पोलैंड के वारसॉ में हुई प्रथम चीन - मध्य व पूर्वी यूरोपीय देश वार्ता हुई । इससे अभी तक के पाँच सालों में चीन और इन देशों के बीच व्यापार रक्म 60 अरब अमेरिकी डालर तक जा पहुंची है और इन देशों में चीन का निवेश भी दुगुना अधिक बढ़ा है ।

वार्ता में चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने कहा कि चीन - मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के बीच सहयोग यानी “16 1” सहयोग कोई राजनीतिक औजार नहीं, लेकिन पार क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने वाला साधन है । चीन - मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के बीच सहयोग न सिर्फ दोनों पक्षों को लाभ मिलेगा, बल्कि विश्व के हित में भी है ।

“16 1” सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ली खछ्यांग ने दो नये कदम घोषित किये यानी कि चीन - मध्य व पूर्वी यूरोपीय बैंक और चीन - मध्य व पूर्वी यूरोप निवेश सहयोग कोष स्थापित किये गये हैं और इन दो संस्थाओं का चीन की तरफ से वित्तीय समर्थन मिल पाएगा । वार्ता में दोनों पक्षों ने चीन के अधिक कृषि उत्पादों की आयात करने, दोनों के बीच अधिक फ्रेट ट्रेन चलाने, तथा वीजा को सरल बनाने पर भी विचार विमर्श किया ।

मध्य व पूर्वी यूरोप एशिया और यूरोप को जोड़ने का महत्वपूर्ण मार्ग है । इस क्षेत्र के 16 देश सब एक पट्टी एक मार्ग के तटस्थ देश हैं । अभी तक इन सब 16 देशों ने चीन के साथ एक पट्टी एक मार्ग में भाग लेने पर समझौता संपन्न किया है ।

हंगरी के प्रधानमंत्री ने प्रेस को बताया कि“16 1” सहयोग करने से तमाम यूरोप को भी लाभ मिलेगा । पहले एशिया का विकास करने में यूरोप की तरफ से तकनीकी व वित्तीय समर्थन चाहिये । आज स्थितियां बदल गयी हैं । यूरोप के विकास को पूर्वी देशों की तकनीकी व वित्तीय सहायता अनिवार्य है ।

वार्ता की समाप्ति पर चीन और 16 मध्य व पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ बुडापेस्ट सहयोग रूपरेखा प्रकाशित की और सिलसिलेवार समझौतों के हस्ताक्षर रस्म में भाग लिया ।

( हूमिन )

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