बांग्लादेश सैन्य विद्रोह में 139 की मौत की सज़ा बरकरार

2017-11-28 17:32:03

वर्ष 2009 में बांग्लादेश में हुए एक सैन्य विद्रोह में दोषी पाए गए 139 सैनिकों को कोर्ट ने 27 नवंबर को मौत की सज़ा बरकरार रखी है। इसके अलावा 127 को उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी है। इस सैन्य विद्रोह में 57 सैन्य अधिकारियों के साथ 74 लोगों की हत्या कर दी गई थी। अटार्नी जनरल महबूब आलम ने मीडिया से कहा कि इस हत्या में दोषी पाए गए 139 लोगों को मौत की सज़ा झेलना होगा और बाकी को उम्रकैद होगी। बांग्लादेश में अबतक की ये सबसे बड़ी सज़ा है।

अटार्नी महबूब ने उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ के फैसले पर कहा कि विद्रोहियों ने ऐसा इसलिये किया कि कोई सैन्य अधिकारी बीडीआर में न बचे। इसलिये उन्होंने इन अधिकारियों की सोची समझी साज़िष के तहत हत्या की। न्यायमूर्ति नज़रुल इस्लाम, न्यायमूर्ति शौकत हुसैन और न्यायमूर्ति अबु जफर सिद्दीकी की एक खंडपीठ ने ये फैसला सुनाया। साथ ही उच्च न्यायालय ने 196 सीमा रक्षकों को जेल में रखने के फैसले को भी बरकरार रखा है।

हालांकि सज़ा पाए हुए दोषियों को सर्वोच्च अदालत में जाने की छूट दी गई है।

कोर्ट ने कहा कि ये सैन्य विद्रोह देश को अस्थिर करने की एक साज़िष थी और वर्ष 2008 में हुए चुनावों के बाद आई प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार का तख्ता पलटने के लिये ऐसा किया गया था। बीडीआर सैनिकों ने ये विद्रोह अपने अधिकारियों के खिलाफ़ बेहतर वेतन और दूसरी सुविधाओं को पाने के लिये किया था।

पंकज श्रीवास्तव

कैलेंडर

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