अमेरिका के येरुशलम को इजराइली राजधानी मानने पर तीखा विरोध

2017-12-08 13:54:03

अमेरिका ने 6 दिसंबर को येरुशलम को इजराइल की राजधानी स्वीकार करने की घोषणा की। साथ ही इजराइल स्थित अमेरिकी दूतावास तेल अवीव से येरुशलम में स्थानांतरित करने को भी तैयार है। संयुक्त राष्ट्र संघ, मिस्र, ब्रिटेन समेत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस कार्रवाई का व्यापक विरोध किया है। उनके ख्याल से यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिये खतरनाक होगा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेसे ने मीडिया से कहा कि वे हमेशा खुले तौर पर ऐसी एकतरफा कार्रवाई का विरोध करते हैं, जिससे फिलिस्तीन व इजराइल की शांति को नुकसान पहुंचेगा। येरुशलम मामले का समाधान फिलिस्तीन व इजराइल दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे की चिंता पर ध्यान देने की पूर्वशर्त पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद व संबंधित प्रस्ताव के अनुसार सीधे वार्ता करनी होगी। दो देशों के प्रस्ताव के अलावा कोई अन्य चुनाव नहीं होगा।

संयुक्त राष्ट्र संघ स्थित फ़्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि फ़्रांस, ब्रिटेन व मिस्र आदि आठ देशों की अपील पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 8 दिसंबर को इस मुद्दे पर एक आपात सम्मेलन आयोजित करेगा।

मिस्र के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ट्रंप की यह कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून व संयुक्त राष्ट्र संघ के संबंधित प्रस्तावों के खिलाफ़ एक एकपक्षीय फैसला है। मिस्र इस पर बहुत चिंतित है।

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मेई ने कहा कि ब्रिटेन ने अमेरिका के इस फैसले को स्वीकार नहीं किया है। क्योंकि यह फैसला क्षेत्रीय शांति के लिये लाभदायक नहीं होगा। साथ ही इजराइल के तेल अवीव में स्थित ब्रिटेन का दूतावास स्थानांतरित नहीं होगा।

उनके अलावा ईरान, सूडान व मलेशिया के विदेश मंत्रालयों ने भी बयान जारी कर अमेरिका के इस फैसले की निंदा की।

चंद्रिमा

कैलेंडर

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