कोरियाई परमाणु मुद्दे से संबंधित विदेश मंत्री सम्मेलन से अलगाव पैदा होगा : चीन

2018-01-17 19:31:01

16 जनवरी को कनाडा और अमेरिका ने तत्कालीन कोरियाई युद्ध में भाग लेने के लिए“संयुक्त राष्ट्र सैनिक”भेजने वाले देशों को संगठित कर वैंकूवर में कोरियाई परमाणु मुद्दे को लेकर विदेश मंत्री सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उत्तर कोरिया के खिलाफ़ सबसे बड़े पैमाने वाला दबाव डालना चाहिए।

इसके प्रति चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू खांग ने 17 जनवरी को चीन की प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति में शैथिल्य आने के समय अमेरिका और कनाडा ने शीत युद्ध विचारधारा दिखाई, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलगाव पैदा होगा, अच्छी तरह समाधान के लिए सभी पक्षों के प्रयासों को नुकसान पहुंचेगा।

बताया जाता है कि 20 देशों ने इस सम्मेलन में भाग लिया, लेकिन वास्तव में केवल 9 देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। चीन और रूस ने इसमें भाग लेने से इनकार किया। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था समेत संयुक्त राष्ट्र संस्था और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन की भागीदारी भी नहीं हुई।

लू खांग ने कहा कि तथाथित“संयुक्त राष्ट्र सैनिक”शीत युद्ध का उत्पाद है, जो अप्रचलित है। अमेरिका और कनाडा की ऐसी कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में विभाजन होगा। कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु मुद्दे का निपटारा करने और समाधान करने का प्रमुख रास्ता फिर भी छह पक्षीय वार्ता का ढांचा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद है। इस तरह अमेरिका और कनाडा द्वारा आयोजित इस सम्मेलन की वैधता और प्रतिनिधित्व पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में व्यापक संदेह मिला है।

लू खांग ने इसी दिन कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु मुद्दे पर चीन का रूख दोहराया और विभिन्न पक्षों से शांति वार्ता के लिए लगातार प्रयास करने की अपील भी की।

(श्याओ थांग)

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