मालदीव मसला देश की जनता के हाथों में- अब्दुल्लाह यामीन

2018-02-09 18:32:08

मालदीव मामले को निश्चित रखने का अंतिम अधिकार देश की जनता के हाथों में है। राष्ट्रपति अब्दुल्लाह यामीन ने 7 फरवरी की रात को यह बात कही।

राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में यामीन के हवाले से कहा गया कि मालदीव इस देश की जनता के लिए है। देश की प्रतिष्ठा को बनाए रखना हरेक नागरिक का कर्तव्य है। देश की प्रतिष्ठा, सरकार और भूमि किसी को भी नहीं बेचा जाना चाहिए।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार मालदीव की विपक्षी पार्टी के नेता मोहम्मद नशीद ने हाल में ट्वीट कर विदेशों से मालदीव को मुक्त करने की आशा जताई।

नशीद ने 7 फरवरी को“इंडियन इक्सप्रेस”में लेख प्रकाशित कर कहा कि राष्ट्रपति यामीन ने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति को बढ़ाने के साथ देश की प्रभुसत्ता को भी बेचा है। चीन समेत विदेशी शक्तियों ने मालदीव की भूमि को छीनने में भाग लिया। जिसमें अहम उपकरण और महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थापन आदि शामिल हैं। इस प्रकार के भूमि लुटने की कार्रवाई से मालदीव की स्वतंत्रता ही नहीं, अखिल हिंद महासागरीय क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा। नशीद के बयान पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कंग श्वांग ने 8 फरवरी को कहा कि चीन मालदीव को बिना किसी राजनीतिक शर्त के सहायता देता है। इस देश की प्रभुसत्ता और स्वतंत्रता को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, न ही हिंद महासागरीय क्षेत्र की सुरक्षा को क्षति पहुंची है।

उन्होंने कहा कि इधर के सालों में चीन और मालदीव एक दूसरे के सम्मान, समानता के आधार पर बुनियादी संस्थापन और जन-जीवन से जुड़ी परियोजनाओं के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं। जिससे मालदीव में आर्थिक परिवर्तन और जन जीवन में सुधार के लिए सकारात्मक भूमिका निभाई। चीन-मालदीव मित्रवत सहयोग मालदीव की जनता के लिए है, जो कि दोनों देशों और दोनों देशों की जनता के समान हितों से मेल खाता है।

(श्याओ थांग)

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