चीन-भारत संबंध : "हरित पहाड़" के निर्माण में "स्वर्ण पहाड़" ही बनेगा

2018-03-12 15:34:05

19वीं सीपीसी कांग्रेस की रिपोर्ट में "हरित विकास" का नारा बुलंद किया गया है और आइये सुनिये इस सवाल को लेकर चाइना रेडियो इंटरनेशनल के टिप्पणीकार का विश्लेषण।

सपना – यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है। सभी श्रोताओं को सपना की नमस्ते।

हू – और सभी श्रोता दोस्तों को हूमिन का भी नमस्कार।

सपना – हू साहब, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 19वीं राष्ट्रीय कांग्रेस में महासचिव शी चिनफिंग ने अपनी रिपोर्ट में "हरित विकास" का नारा बुलंद किया है और उन्होंने कई बार यह विचार भी प्रस्तुत किया है कि "हरित पहाड़" बनाने से "स्वर्ण पहाड़" ही बनेगा। जिसने विश्व का ध्यान आकर्षित किया है। हम जानते हैं कि चीन के आर्थिक विकास में लम्बे अरसे के लिए जीडीपी की वृद्धि पर ज़ोर लगाया जा रहा है और इससे वातावरण को प्रदूषित करने की गंभीर समस्याएं उभरने लगी हैं। इसी स्थिति में पारिस्थितिकी की बहाली करने और प्राकृतिक वातावरण का संरक्षण करने का सवाल सामने आया है। क्या आप इस सवाल पर अपना विचार बता सकते हैं ?

हू – जी हां। चीन का आर्थिक रूपांतर वर्ष 1978 में शुरू हुआ था। तबसे अभी तक चीन की अर्थव्यवस्था दर्जनों गुणा बढ़ी है। इस समय चीन अमेरिका के बाद विश्व की दूसरी आर्थिक ताकत बन गया है, पर इस विकास ने अपनी कीमत भी चुकाई है यानी प्रदूषण की समस्या उभरी है। इसी स्थिति को बदलने के लिए चीन ने हरित विकास की योजना बनायी है और विकास करने का विचार भी बदल गया है, जैसे महासचिव शी चिनफिंग ने कहा है कि पर्यावरण को बिगाड़ने की कीमत पर आर्थिक विकास करना सही नहीं है, क्योंकि "हरित पहाड़" सुरक्षित करने से "स्वर्ण पहाड़" ही बनता है।

सपना – लेकिन चीन के आर्थिक विकास में एक विशेषता है विनिर्माण उद्योग का विकास करना। मुक्ति से पहले चीन किसी भी औद्योगिक वस्तु को बनाने में असमर्थ था, आज दुनिया के किसी भी कोने में मेड इन चाइना दिखता रहा है। लेकिन विनिर्माण उद्योग के विकास में जरूर ही प्रदूषण की समस्या होगी, आज भारत सहित कुछ विकासमान देशों ने भी विनिर्माण उद्योग का विकास करना शुरू किया है। उन्हें मालूम है कि विनिर्माण उद्योग के विकास में पर्यावरण प्रदूषण से बच नहीं सकता, पर इन के लिए यह एक मात्र रास्ता ही है।

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