मोहम्मद साकिबः चीन-भारत आर्थिक व व्यापारिक आवाजाही की नयी प्रवृत्ति का सक्रिय मूल्याकन

2018-04-02 15:02:07

भारतीय अर्थशास्त्री और भारत-चीन आर्थिक व सांस्कृतिक संवर्द्धन संघ के महासचिव मोहम्मद साकिब ने हाल में चीनी समाचार एजेंसी शिनह्वा न्यूज एजेंसी के पत्रकार के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि हालांकि हाल में चीन और भारत के बीच तथाकथित ड्रैगन और हाथी का विवाद मौजूद है। फिर भी यथार्थ विश्लेषण से हमें पता चलेगा कि चीन और भारत की समान कहानियां विभिन्न क्षेत्रों में सुनायी जाती है।

23 से 27 मार्च को चीनी वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रतिनिधि मंडल ने भारत की यात्रा की। मौके पर चीन और भारत के उद्यमों के बीच कुल 101 व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनकी कुल रकम करीब 2.368 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंची। चीनी वाणिज्य मंत्री चोंग शांग ने भारतीय व्यापार व उद्योग मंत्री प्रभु के साथ दिल्ली में द्विपक्षीय आर्थिक व व्यापारिक संयुक्त दल की 11वीं बैठक की सहअध्यक्षता की और द्विपक्षीय आर्थिक व व्यापारिक यथार्थ सहयोग को और गहरा करने पर विचार विमर्श किया।

चीन-भारत आर्थिक व व्यापारिक आदान प्रदान की नयी प्रवृत्ति को लेकर साकिब ने सक्रिय मूल्यांकन किया। उनका मानना है कि हाल में ड्रैगन व हाथी के मिलकर नाचने से दो बड़े एशियाई देशों के आर्थिक सहयोग को विश्व मंच के केंद्र में बढ़ावा दिया जा रहा है।

साकिब ने कहा कि भारतीय निर्माण उद्योगों को चीन से कच्चे सामग्रियों और मशीनरी को आयातित करने से खुद की प्रतिस्पर्द्धा श्रेष्ठता को उन्नत करने की आवश्यक्ता है। चीन की विज्ञान, तकनीक और पूंजी भी भारत के विकास में मदद दे सकती है। चीन बुनियादी संरचना का शक्तिशाली देश है, जबकि बुनियादी संरचना के क्षेत्र में क्षमता का अभाव भारत सरकार की सब से बड़ी चिंता है।

साकिब ने कहा कि चीन की उत्पादन क्षमता को तदनुरुप बाजार की जरूरत है, जबकि भारत को नवाचार के विकास फार्मूले में परिवर्तित करने की आवश्यक्ता है। अब यह वक्त आ चुका है।

गौरतलब है कि 2003 में स्थापित भारत-चीन आर्थिक व सांस्कृतिक संवर्द्धन संघ का मुख्यालय दिल्ली में है, जो भारत में चीन व भारत के आर्थिक व सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रथम औपचारिक गैर सरकारी संगठन है।

(श्याओयांग)

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