व्यापारिक आतंकवाद से भी नहीं बच सकता बदहाल अमेरिका

2018-06-20 14:03:01

अमेरिकी ट्रंप सरकार ने 18 जून की रात को फिर एक बार बयान जारी कर पहले के 50 अरब अमेरिकी डॉलर के आधार पर और दो खरब अमेरिकी डॉलर वाले चीनी उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ़ बढ़ाने की धमकी दी। इसकी चर्चा में चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका की आलोचना की कि अमेरिका की इस अत्यधिक दबाव डालने और भय पैदा करने की कार्रवाई ने दोनों पक्षों द्वारा कई बार विचार-विमर्श के बाद प्राप्त सहमतियों का उल्लंघन किया। जिस पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय बहुत निराश है। अगर अमेरिका बिना तर्क वस्तुओं की सूची जारी करेगा, तो चीन विवश होकर इसका जबरदस्त जवाब देने के लिये व्यापक कदम उठाएगा।

50 अरब से दो खरब अमेरिकी डॉलर तक यहां तक कि अमेरिकी ह्वाइट हाऊस के बयान में यह कहा गया है कि अगर चीन फिर एक बार टैरिफ़ बढ़ाता है, तो अमेरिका और दो खरब अमेरिकी डॉलर वाले उत्पादों पर टैरिफ़ बढ़ाएगा। अब तक अमेरिका ने कुल मिलाकर 4.5 खरब अमेरिकी डॉलर वाले चीनी उत्पादों पर टैरिफ़ बढ़ाने की धमकी दी है। पर चीनी सीमा शुल्क अखिल ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2017 में अमेरिका में चीन से आयातित वस्तुओं की कुल रकम केवल 4 खरब 29 अरब 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर थी। इसका मतलब यह है कि अगर अमेरिका उक्त सूची का लागू करेगा, तो अमेरिकी बाजार सभी चीनी उत्पादों के प्रति द्वार बंद करेगा।

ऐसी स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय स्पष्ट रूप से यह समझता है कि अमेरिका का लक्ष्य व्यापारिक संतुलन नहीं है। वह केवल व्यापारिक टैरिफ़ के माध्यम से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सेना, विज्ञान व तकनीक आदि क्षेत्रों में अपने प्रभुत्व की रक्षा करना चाहता है। वास्तव में यह कार्रवाई व्यापारिक आतंकवाद ही है। पर यह कार्रवाई अमेरिका में मौजूद समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगी, वह भी बदतर हो रहे अमेरिका को नहीं बचा सकती।

चंद्रिमा

कैलेंडर

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