व्यापार युद्ध के बीच चीन यूरोप सहयोग एक मूल्यवान उदाहरण है

2018-06-26 11:05:00

25 जून को सातवां चीन-यूरोप आर्थिक और व्यापारिक वार्तालाप पेइचिंग में आयोजित हुआ। यह चीन और यूरोपीय संघ के बीच सर्वोच्च स्तरीय आर्थिक और व्यापारिक वार्ता तंत्र है। इस वार्ता में सिलसिलेवार समानताएं और उपलब्धियां हासिल हुईं, जो चीन और यूरोपीय संघ की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतीक्षा से खरी उतरी है।

इस बार आयोजित वार्तालाप की पृष्ठभूमि पहले की तुलना में असामान्य है। एक तरफ आकाश में ट्रेड वॉर के बादल मंडरा रहे हैं , वहीं चीन और यूरोपीय संघ दोनों अमेरिकी व्यापार के दबाव में हैं। दूसरी तरफ, चालू साल चीन के सुधार और खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ और चीन यूरोपीय संघ सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की 15वीं वर्षगांठ भी है। यह चीन और यूरोप के बीच सहयोग के विस्तार का अच्छा मौका है।

वार्ता में चीन और यूरोपीय संघ ने समान विचार जताया कि एकतरफावाद और व्यापारिक संरक्षणवाद का डटकर विरोध करना है। दोनों ने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की रक्षा करने और विश्व आर्थिक व्यवस्था को संपूर्ण बनाने का वायदा किया। इस समानता से न सिर्फ चीन और यूरोपीय संघ की व्यापारिक आत्मरक्षा की चेतना जाहिर हुई ,बल्कि विश्व में दो महत्वपूर्ण आर्थिक समुदाय होने के नाते चीन और यूरोपीय संघ की जवाबदेही भी दर्शायी गयी।

उल्लेखनीय बात है कि चीन और यूरोपीय संघ की कुल आर्थिक मात्रा विश्व का 40 प्रतिशत है। दोनों ने जो एक ही आवाज़ बोली है, उसने पूरे विश्व में एकतरफावाद और संरक्षणवाद के विरोध का मौसला बुलंद किया है और डांवांडोल अंतररराष्ट्रीय स्थिति में स्थिर तत्व डाला है।

(वेइतुंग)

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