डब्ल्यूटीओ में भाग लेने के 17 सालों में चीन ने क्या वचन दिया

2018-06-28 20:02:06

डब्ल्यूटीओ में भाग लेने के 17 सालों में चीन ने क्या वचन दिया

चीनी राज्य परिषद की प्रेस दफ्तर ने 28 जून को पहली बार चीन और विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) के श्वेत पत्र जारी किया और डब्ल्यूटीओ में चीन की भागीदारी के 17 सालों में चीन द्वारा अपने वचन का पालन करने, बहुपक्षीय व्यापारिक सिस्टम का दृढ़ समर्थन करने और विश्व को दिये गये योगदान पर प्रकाश डाला।

क्या चीन ने डब्ल्यूटीओ में भाग लेते समय दिये गये वचन का पालन किया?

डब्ल्यूटीओ में भाग लेते समय चीन के अधिकांश उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ा। जो उनके लिए बहुत कठिन था। वाहन उद्योग की मिसाल लें। डब्ल्यूटीओ में भाग लेने के बाद वाहनों के टैरिफ में 25 प्रतिशत की कटौती आयी थी। इसलिए चीनी मोटर वाहन उद्यमों को विवश होकर बड़े पैमाने वाला सुधार करना पड़ा और निरंतर विदेशी पूंजी के लिए अपने बाजार को खोलना पड़ा। इससे चीनी मोटर वाहन उद्योग की तकनीक, प्रबंध और सेवा क्षमता भी निरंतर उन्नत होती रही और धीरे-धीरे वैश्विक मूल्य चेन में शामिल हुई।

डब्ल्यूटीओ में भाग लेने के पिछले 17 सालों में चीन ने कार्गो व्यापार, सेवा व्यापार और बौद्धिक संपदा के संरक्षण तीन वचों का कड़ाई से पालन कर केंद्रीय और स्थानीय सरकारों के कानूनों व नियमावलियों में संशोधन किया। साथ ही चीन ने आयात टैरिफ को बड़े हद तक कम किया और सेवा बाजार को खोलकर स्वेच्छा से बौद्धिक संपदा का संरक्षण किया।

सेवा व्यापार क्षेत्र में चीन ने 2007 में ही विश्व व्यापार के 9 किस्मों के 100 शाखा भागों को खोलने के अपने वायदे का पालन किया। साथ ही चीन ने बैंकिंग, कंप्यूटर, टेलिकॉम आदि क्षेत्रों में क्रमशः विदेशी पूंजी के कारोबारों को राष्ट्रीय व्यवहार देने की सुविधा भी दी। चीन ने परिपूर्ण बौद्धिक संपदा के संरक्षण की कानूनी सिस्टम की स्थापना भी की। 2001 से हर साल चीन द्वारा विदेशों को दिये गये बौद्धिक संपदा के खर्चे में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2017 में यह मात्रा 28.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंची थी।

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