विदेशी लोग क्यों चीनी अदालत में बौद्धिक संपदा अधिकार का उल्लंघन मामला उठाना चाहते हैं

2018-07-02 17:32:00

अमेरिका द्वारा चीन के 34 अरब अमेरिकी डॉलर की वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ लाने की तिथि करीब आने के साथ चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध के हालात पैदा होने वाले हैं। ह्वाइट हाउस चीन पर तथाकथित बौद्धिक संपदा अधिकार की अपर्याप्त सुरक्षा का आरोप लगाता है, लेकिन हकीकत क्या है।

ब्रिटिश वाणिज्य वेबसाइट रिकॉन्टोर डॉट नेट (Raconteur.net) की रिपोर्ट के अनुसार कानूनी सुनवाई की पारदर्शिता और न्याय के कारण चीन इधर कुछ साल विदेशी कंपनियों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े मामले के निपटारे के लिए पसंदीदा स्थल बन गया है। वर्ष 2015 में कुल 65 विदेशी कंपनियों ने पेइचिंग बौद्धिक संपदा अधिकार अदालत में अन्य विदेशी कंपनियों के खिलाफ़ मुकादमा चलाया और जीत भी हासिल की।

अधिकाधिक विदेशी कंपनियां चीन में बौद्धिक संपदा अधिकार के मामले उठा रही हैं। इस से जाहिर है कि वे चीन की बौद्धिक संपदा अधिकार की सुरक्षा व्यवस्था पर विश्वास करती हैं।

इधर कुछ साल चीन ने बौद्धिक संपदा अधिकार के उल्लंघन मामलों के प्रति सख्त सज़ा उठाई है। इसके अलावा वर्ष 2001 से चीन द्वारा दी गयी वैदेशिक बौद्धिक संपदा अधिकार फीस की सालाना वृद्धि दर 17 प्रतिशत है और वर्ष 2017 में यह खर्च 28 अरब 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा।

इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अमेरिकी सरकार द्वारा चीन पर लगाया गया तथाकथित बौद्धिक संपदा अधिकार की अपर्याप्त सुरक्षा का आरोप सत्य नहीं है। उसका असली उद्देश्य चीन के वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक विकास पर लगाम लगाना है। चीन ट्रेड वॉर नहीं चाहता, पर इस से डरता भी नहीं है। चीन ईंट का जवाब पत्थर देगा। इसके साथ चीन बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण को मज़बूत बनाता रहेगा और हाई टेक क्षेत्र में अपना अनुसरण कभी भी नहीं छोड़ेगा।

(वेइतुंग)

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