अमेरिका का तकनीकी हेगोनिज्म किधर तक जाएगा

2018-07-14 17:32:01

अमेरिका विश्व में सबसे शक्तिशाली तकनीक ताकत मानी जाती है। अमेरिका की विज्ञान व तकनीक की नवाचार क्षमता भी विश्व के अग्रिम पंक्ति में खड़ी हुई है। सूचना संचार, कृत्रिम बुद्धि और बायोमेडिसिन जैसे तकनीकी क्षमता के संदर्भ में अमेरिका का वर्चस्व नहीं हिलाया जाएगा। लेकिन अमेरिका ने व्यापार मुठभेड़ छेड़कर चीन और अमेरिका के बीच वैज्ञानिक व तकनीकी सहयोग को परिसीमित करना और कोर तकनीकों के माध्यम से दूसरे देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाना शुरू किया। इससे अमेरिका का तकनीकी हेगोनिज्म सिद्ध हुआ है।

अमेरिका हमेशा से कोर तकनीक के जरिये अपने प्रतिद्वंद्विता को दबाता रहा है और बौद्धिक संपदा अधिकार के दुरुपयोग से बाजार एकाधिकार कायम करता है। अमेरिका ने अकसर अपनी तकनीकी क्षमता से उपकरण या कच्चे माल की कीमतों को बढ़ाता है और यहां तक कि दूसरे देशों के कारोबारों को प्रतिबंध लगाता है। इसके अतिरिक्त अमेरिका ने अकसर राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने से सामान्य बाजार प्रतिस्पर्धा में हस्तक्षेप करता है। और उच्च तकनीक निर्यात के प्रति सख्त नियंत्रण लागू करता है।

दूसरी तरफ अमेरिका ने कर वसुलने के माध्यम से दूसरे देशों के उच्च तकनीकी मालों के आयात को परिसीमित किया और इससे दूसरे देशों के उच्च तकनीक उद्योग के विकास को रोक दिया। इस तरह अमेरिका ने व्यापार तर्क का उल्लंघन कर वैश्विक मूल्य श्रृंखला को प्रहार किया है। दीर्घकाल तक अमेरिका वैश्विक कोर प्रौद्योगिकी का अपना प्रमुख स्थान पर दृढ़ता से बनाया रखता है। लेकिन अमेरिका ने एक तरफा तौर पर तकनीकी निर्यात को प्रतिबंधित करने और दूसरे देशों में तकनीकी प्रगति को अवरुद्ध करने की कोशिश की। यह कार्यवाही तकनीकी हेगोनिज्म ही है, जिससे गंभीर परिणाम पैदा हो जाएगा। अमेरिका द्वारा दूसरे देशों के तकनीकी विकास की उपेक्षा करने से अपने को अकेलापन डाला जाएगा। उन्नतिशील प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण अनिवार्य है।

नवाचार क्षमता के विकास के लिए खुलेपन की जरूरत है। तकनीकी आदान प्रदान को अवरुद्ध करने से अपने खुद को भी नुकसान पहुंचाया जाएगा। आज आर्थिक भूमंडलीकरण की प्रवृत्ति अपरिवर्तनीय है। किसी भी देश की तकनीकी दबदबा से वैश्वीकरण को नहीं रोका जाएगा।

( हूमिन )

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