इज़रायल के संसद में यहूदी जाति-राज्य बिल पारित, फिलिस्तीन ने निंदा की

2018-07-20 15:01:59

स्थानीय समय के अनुसार 19 जुलाई की सुबह इज़रायल की संसद में यहूदी जाति-राज्य बिल पारित हुआ। इस बिल के अनुसार इज़रायल में यहूदी जाति आत्मनिर्भरता के अधिकार का एकाधिकार का आनंद ले सकता है। फिलिस्तीन ने इस बात की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस बिल पर जातिवाद का रंग चढ़ा हुआ है। इस बिल के कारण फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों को आघात लगा है।

यहूदी जाति-राज्य बिल में पहली बार से निर्धारित हुआ कि “इज़रायल यहूदी जातीय का देश है। इज़रायल में यहूदी जाति आत्मनिर्भरता के अधिकार का एकाधिकार आनंद ले सकता है।” साथ ही इस बिल में स्पष्ट किया जाता है कि इज़रायल की राजधानी “पूर्ण और एकीकृत यरूशलेम” है। इस बिल में निश्चित हुआ कि हिब्रू भाषा इज़रायल की सरकारी भाषा है, जबकि यहूदी कैलेंडर इज़रायल का आधिकारिक कैलेंडर है। इसके अलावा इस बिल के अनुसार यहूदी निपटान के निर्माण में इज़रायल का राष्ट्रीय हित है। इज़रायल इस कार्य को प्रोत्साहित करने, बढ़ाने और लागू करने के लिये कदम उठाएगा।

इज़रायल के अरबी सीनेटरों ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया। कुछ विपक्षी पार्टियों के सीनेटों ने इस बिल का विरोध भी किया। आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में इज़रायल की कुल जनसंख्या में से अरबी का अनुपात 20 प्रतिशत पहुंचा है।

उसी दिन फिलिस्तीनी लिबरेशन संगठन (पीएलओ) की कार्यकारी समिति के महासचिव साईब इरेकट ने बयान किया कि यहूदी जाति-राज्य बिल का लक्ष्य इज़रायल में रंगभेद प्रणाली का वैधीकरण बनाना और इस भूमि पर आदिवासियों के अधिकारों से जानबूझकर वंचित करना है। फिलीस्तीनी विदेश मंत्रालय ने बयान किया कि अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, संधि और मानवीय सिद्धांतों को नजरअंदाज करते हुए इज़रायल के संसद में यह बिल पारित होना। यह बात एक सबसे बुरा व्यवहार है। यह पूरी दुनिया के प्रति इज़रायल की दक्षिणपंथी सरकार का स्पष्ट संदेश है कि इज़रायल ने “दो-राज्य योजना” के आधार पर फिलिस्तीनी-इजरायली विवादों के राजनीतिक समाधान का प्रयास करने से इनकार किया। इज़रायल सरकार ने फिलीस्तीनी भूमि पर फिलीस्तीनी जनता की इतिहास, संस्कृति, सभ्यता और जाति के अस्तित्व से खुले तौर पर इनकार किया।(हैया)

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