क्या ब्रिक्स चमक खो रहा है?

2018-07-21 19:39:06

क्या ब्रिक्स चमक खो रहा है?

इस साल जुलाई के अंत में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स देशों का दसवां शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। साल 2001 में, गोल्डमैन सैक्स के मुख्य अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने कहा कि ब्रिक्स देशों- ब्राजील, रूस, भारत और चीन (दक्षिण अफ्रीका साल 2010 में शामिल हुआ) की उभरती अर्थव्यवस्थाएं पावरहाउस होंगी जो वैश्विक आर्थिक विकास का नेतृत्व करेंगी। हाल ही में, हालांकि ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं की प्राण शक्ति के बारे में संदेह किये गये हैं। लेकिन तथ्यों पर एक नज़र डालने से इन संदेहों को दूर करने में मदद करती है।

अनगिनत बहुपक्षीय तंत्रों के बीच, ब्रिक्स एक लंबे इतिहास का दावा नहीं करता है। लेकिन इन दो कारणों से आगे निकलता हुआ दिखाई देता है। पहला, सदस्यों की छोटी संख्या दुनिया की 42 प्रतिशत आबादी और 25 प्रतिशत से अधिक भूभाग के साथ, दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विशाल विस्तार का प्रतिनिधित्व करती है। प्रत्येक सदस्य अपने तरीके से अद्वितीय हैं, जो सहयोग का एक अत्यधिक पूरक मॉडल का निर्माण करते हैं।

और दूसरा, यह अपने सामूहिक आर्थिक प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। इस गुट में आर्थिक विकास दर ने दुनिया की औसत और कई अपेक्षाओं से आगे निकल गया है। दक्षिण अफ़्रीकी स्टैंडर्ड बैंक के अर्थशास्त्री जेरेमी स्टीवंस ने 2014 में बीजिंग में एक ब्रिक्स आर्थिक मंच में कहा कि साल 2008 से 2017 तक दुनिया की औसत वृद्धि दर लगभग 1 प्रतिशत होगी, जबकि ब्रिक्स राष्ट्रों की 8 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद थी।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से इस आशावाद को मजबूत किया गया है, जो दिखाता है कि पिछले दस वर्षों में ब्रिक्स ने कुल वैश्विक आर्थिक मूल्य के अपने हिस्से को 12 से 23 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। उनकी व्यापार मात्रा दुनिया के कुल 11 से 16 प्रतिशत तक बढ़ी है। और आउटबाउंड निवेश 7 से 12 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो दुनिया के विकास का आधा हिस्सा है।

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