चीन और भारत दोनों को व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाना चाहिए : एक भारतीय बैंकर

2018-07-29 18:32:00

एक भारतीय बैंकर ने कहा कि चीन और भारत दोनों को ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाना चाहिए।

सिन्हुआ के साथ एक साक्षात्कार में ग्लोबल बैंकिंग और एचएसबीसी इंडिया के लिए मार्केट्स के प्रमुख हितेन्द्र डेव ने कहा, "भारत और चीन दुनिया में दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं। हम मजबूत व्यापारिक साझेदार बन सकते हैं।"

डेव का मानना था कि भारत की आबादी की खपत शक्ति चीनी कंपनियों से अधिक निवेश आकर्षित करेगी। उन्होंने कहा, "भारत के पास दुनिया की कामकाजी आबादी का 18 प्रतिशत हिस्सा है और साल 2025 तक 550 मिलियन मध्यम वर्ग होने की उम्मीद है, जिससे भारत में चीनी निवेश के मौके काफी स्पष्ट हैं।"

भारतीय बैंक ने यह भी उम्मीद की कि स्वच्छ ऊर्जा की साझा दृष्टि भारत और चीन के बीच अधिक व्यापार अवसर प्रदान करेगी।

भारतीय बैंकर डेव ने कहा, "हरित अर्थव्यवस्था बनाने में उनके बीच बड़े सहयोग और सहभागिता वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में एक लंबा रास्ता तय करेंगे।" इसके अलावा, उन्होंने चीन और भारत के बुनियादी ढांचे पर सहयोग करने की बड़ी संभावना देखी।

उन्होंने यह भी कहा, "चीन को बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसे हवाई अड्डों, राजमार्गों और सबवे में अत्याधिक अनुभव प्राप्त है। भारत को उस पूंजी के साथ-साथ प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होगी और चीन के निष्पादन क्षमता से अपने बुनियादी ढांचे के विकास को आगे बढ़ाने के लिए सीखना चाहिए।"

चीन के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल चीन में भारतीय निर्यात करीब 40 फीसदी बढ़कर 16.34 अरब डॉलर हुआ, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार सालाना 20.3 फीसदी बढ़कर 84.4 अरब डॉलर रहा।

डेव ने यह भी कहा, "द्विपक्षीय व्यापार मजबूत विकास बनाएगा। अगर इस साल पैमाना 100 अरब डॉलर से ऊपर हुआ तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।"

(अखिल पाराशर)

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