टिप्पणीः चीन को आरएमबी की विनिमय दर नियंत्रित करने की जरूरत नहीं

2018-07-31 15:07:55

टिप्पणीः चीन को आरएमबी की विनिमय दर नियंत्रित करने की जरूरत नहीं

अमेरिका द्वारा हाल में एकतरफ़ा तौर पर चीन की निंदा की गयी कि चीन ने आरएमबी की विनिमय दर को नियंत्रित किया है। आईएमएफ़ के प्रथम अर्थशास्त्री मौरिस ओबस्तफेल्द ने हाल में अमेरिकी मीडिया से कहा कि उनके पास चीन द्वारा मुद्रा के नियंत्रण करने का कोई सबूत नहीं है।

वास्तव में चीन द्वारा मुद्रा विनिमय दर नियंत्रित करने की दलील पुरानी है, जिसका यथार्थ सबूत नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कंग श्वांग ने कहा कि आरएमबी की विनिमय दर मुख्यतः बाजार की सप्लाई व मांग से निर्धारित होती है। विनिमय दर में अस्थिरता सामान्य बात है। चीन मुद्रा अवमूल्यन से निर्यात को प्रेरित नहीं करना चाहता है।

विश्लेषकों का मानना है कि चीन को विनिमय दर नियंत्रित कर निर्यात को प्रेरित करने की आवश्यक्ता नहीं है, जिनके निम्न तीन कारण हैं।

एक, चीन में घरेलू उपभोग चीन के आर्थिक विकास की प्रमुख शक्ति बन चुका है। इस साल के पूर्वार्द्ध में चीन में जीडीपी की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत थी, जिसमें उपभोग का योगदान 78.5 प्रतिशत तक पहुंचा है।

दूसरा, खुलेपन का विस्तार कर आरएमबी को दृढ़ समर्थन दिया जा सकेगा। यूरोप और अमेरिका आदि देशों के वित्तीय बाजार के लिए चीन का वित्तीय बाजार का लाभांश और ऊँचा है और निहित शक्ति और बड़ी है। अनुमान है कि विदेशी पूंजी निरंतर चीन में प्रवेश करती रहेगी। सीमा पार पूंजी का प्रचलन संतुलित होगा।

तीसरा, आरएमबी के अवमूल्यन से चीन को कोई फायदा नहीं मिल सकता है। इस साल से चीन ने खुलेपन को आगे गहन करने के लिए सिलसिलेवार कदम पेश किए। यदि इस समय चीन आरएमबी के अवमूल्यन को नियंत्रित करता, तो आयात का खर्चा अवश्य ही बढ़ जाता।

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