अमेरिका की चालबाजी की साफ-साफ पहचान करें

2018-08-01 19:31:59

रिपोर्ट है कि अमेरिका वित्त मंत्री और चीन के उप प्रधानमंत्री ल्यू हे के बीच चीन-अमेरिका व्यापार के प्रति वार्ता की जा रही है। साथ ही अमेरिका में 16 अरब अमेरिकी डालर मूल्य वाले चीनी मालों के खिलाफ विशेष कर वसुलने की संभावना भी मौजूद है। जानकार सूत्रों के अनुसार अमेरिका कुल 2 खरब डालर मूल्य वाले चीनी मालों के प्रति 25 प्रतिशत कर वसुलने पर भी विचार कर रहा है।

अमेरिका ने चीन के साथ वार्ता करने की आवाज उठाने के साथ साथ चीनी मालों के खिलाफ कर वसुलने की धमकी दी है। बेशक अमेरिका को समस्या का समाधान करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इसके बजाये वह ऐसे करने से ज्यादा से ज्यादा हित जीतना चाहता है। लेकिन चाहे अमेरिका चीनी मालों के प्रति कितना भी कर वसुलने का कदम उठाए, चीन इसका सख्ती से जवाब देने को तैयार है।

लोग यह देख पाते हैं कि चीन के साथ व्यापार युद्ध छेड़ने के पीछे अमेरिका का उद्देश्य यही है, यानी कि पहला, अमेरिका कठोर कदम उठाकर चीन पर दबाव डालना चाहता है, ताकि चीन को विवश होकर रियायत देना पड़े। लेकिन चीन के पास अपना विकास करने का संसाधन व शक्ति भी है। और चीन स्वतंत्र व्यापार और बहुपक्षीय प्रणाली पर डटा रहता है, जिससे चीन का विश्व में व्यापक समर्थन भी किया जा रहा है। दूसरा, अमेरिका में व्यापार युद्ध का विरोध करने की बुलंद आवाज़ भी सुनी जा रही है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी 31 जुलाई को अपने व्याख्यान में इस बात को माना कि चीन के साथ व्यापार घर्षण से अमेरिकी किसानों को क्षति पहुंची है। अमेरिका का अर्थतंत्र उतना अच्छा भी नहीं है। द्वितीय तिमाही में अमेरिका की वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत तक रही, जबकि निवेश मात्रा प्रथम तिमाही से कम होने लगी है। राष्ट्रपति ट्रम्प की कर कटौती की योजना से अमेरिका के विनिर्माण की बहाली में गति नहीं आयी है। साथ ही अमेरिका के कुछ बड़े उद्योगधंधों को भी अधिकाधिक तौर पर दबाव का सामना करना पड़ा है। अर्थशास्त्रियों ने यह चेतावनी दी है कि व्यापार युद्ध की सभी लागत अमेरिकी उपभोक्ताओं को उठानी पड़ेगी। और व्यापार युद्ध छेड़ने से अमेरिकी अर्थतंत्र मंदी की बेड़ियों में जकड़ने का खतरा भी मौजूद है। तीसरा, ट्रम्प सरकार की साजिश चीन के साथ व्यापार घाटे को दूर करना नहीं, बल्कि चीन का विकास रास्ता बदलना ही है। चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक समस्याओं का बातचीत से समाधान किया जा सकता है। लेकिन अमेरिका ने चीन के खिलाफ बार-बार वचन तोड़कर अधिकाधिक धमकी दी है। अमेरिका ने चीन को ढ़ांचागत रुपांतर को स्वीकार करवाना चाहा है और मूल रूप से चीन का विकास मोड एवं रास्ता बदलना चाहा है।

लेकिन किसी भी देश को अपना विकास रास्ता चुनने का अधिकार है। अमेरिका व्यापार युद्ध करने से भी चीन की विकास रणनीति को नहीं बदल सकेगा। और किसी भी वार्ता को समानता, समादर और विश्वास के आधार पर रखना चाहिये। चीन व्यापार युद्ध नहीं करना चाहता है, बल्कि चीन इससे डरता भी नहीं है। यदि अमेरिका वार्ता से सवाल का समाधान करना चाहता है, तो उसे भी अपनी ईमानदारी दिखानी चाहिये।

( हूमिन )

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