पेइचिंग में चीन-जापान शांति और मैत्री संधि की 40वीं वर्षगांठ पर संगोष्ठी

2018-08-13 15:02:01

11 अगस्त को पेइचिंग में चीन-जापान शांति और मैत्री संधि की 40वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। सैकड़ों चीनी व जापानी विद्वानों और प्रतिनिधियों ने संगोष्ठी में भाग लिया और चीन व जापान के बीच संबंधों का स्वस्थ विकास करने पर अपने विचार प्रस्तुत किये।

चीन के भूतपूर्व स्टेट कांउसिलर डैई पींगक्वो ने भाषण देते हुए कहा कि चीन-जापान संबंधों के विकास के साथ-साथ दोनों देशों के बीच हितों का जुड़ाव भी गहराई में चलाया गया है। चीन यह कभी नहीं भूलेगा कि जापान हमेशा से चीन के रुपांतर व खुलेपन का समर्थन करता आ रहा है। इस साल चीन के रुपांतर व खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ है। दोनों देशों को मौका पकड़कर सहयोग व उभय जीत का रास्ता चुनना चाहिये, ताकि दोनों देशों की जनता को कल्याण प्राप्त हो सके।

संगोष्ठी में उपस्थित जापानी भूतपूर्व प्रधानमंत्री हातोयामा यूकियो ने कहा कि अपने पड़ोसी देशों के साथ बातचीत और सहयोग करने से समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने चीन द्वारा प्रस्तुत एक पट्टी एक मार्ग के पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि जापान और चीन तकनीक और पूंजी के संदर्भ में सहयोग कर सकेंगे और जापान को जल्द ही एशियाई निवेश बैंक में हिस्सा लेना चाहिये। आशा है कि जापान और चीन ऐतिहासिक सबक लेकर एक दूसरे का समादर करेंगे और एक दूसरे की मदद करने वाले मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करेंगे।

वर्ष 1978 के 12 अगस्त को पेइचिंग में चीन-जापान शांति और मैत्री संधि की हस्ताक्षर किये गये थे। इसे और इससे पहले के 1972 चीन-जापान संयुक्त वक्तव्य, 1998 की चीन-जापान संयुक्त घोषणा तथा 2008 के रणनीतिक और पारस्परिक संबंधों को व्यापक रूप से बढ़ावा देने पर चीन-जापानी संयुक्त वक्तव्य को चीन और जापान के बीच संपन्न चार राजनीतिक दस्तावेज़े माने जाते हैं। जो चीन और जापान के बीच सहयोगी संबंधों का विकास करने की नींव भी कहलाती है।

( हूमिन )

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