दक्षिण एशिया में समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए सार्क को पुनर्जीवित किया जाए : नेपाली विदेश मंत्री

2018-08-16 10:32:02

नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने बुधवार को दक्षिण एशिया क्षेत्र में समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

राजधानी काठमांडू में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने आशा जतायी कि सार्क दक्षिण एशिया क्षेत्र में समृद्धि को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा, "एक शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध दक्षिण एशिया हमारे हित में है। एक आम मंच के रूप में, सार्क इस क्षेत्र में समृद्धि को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हमें सार्क को पुनर्जीवित करने के लिए काम करना चाहिए। हमें इसे एक ऐसा संगठन बनाना होगा जो वास्तविक परिणाम दे सके। गहन एकीकरण के बिना हम क्षेत्रीय सहयोग के फलों का आनंद नहीं ले सकते हैं।"

विदेश मंत्री ग्यावली ने यह भी कहा कि सार्क सदस्य देशों को ठोस परिणामों को हासिल करने के लिए व्यापार, निवेश, पर्यटन और कनेक्टिविटी के मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने दक्षिण एशियाई देशों के राजनयिकों की उपस्थिति के दौरान कहा, "नेपाल हमेशा से सार्क चार्टर में स्थापित उद्देश्यों को साकार करने में सक्रिय रहा है और मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते एकजुटता, सहयोग और साझेदारी की भावना के साथ सदस्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है।"

बता दें कि सार्क एक क्षेत्रीय निकाय है जो 1985 में दक्षिण एशिया में स्थापित हुआ था, जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल है। वर्तमान में नेपाल सार्क की अध्यक्षता कर रहा है।

नेपाली विदेश मंत्री की टिप्पणी उस समय आयी है जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमावर्ती तनाव के बीच 2016 में रद्द किये जाने के बाद सार्क सदस्य देश 19वीं सार्क शिखर सम्मेलन आयोजन पर सहमति बनाने में असफल रहे हैं।

तब से, सार्क की अध्यक्षता में नेपाल ने सार्क शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए भारत और पाकिस्तान से आग्रह किया है।

पिछले साल 9-10 नवंबर को इस्लामाबाद में होने वाले 19वीं सार्क शिखर सम्मेलन को रद्द कर दिया गया। भारत, अफगानिस्तान, भूटान और बांग्लादेश ने पाकिस्तान पर दोष लगाते हुए कि वह दक्षिण एशिया में सीमा-पार आतंकवाद का मुकाबला करने में सहयोग नहीं कर रहा है, शिखर सम्मेलन का बहिष्कार करने का फैसला किया।

पाकिस्तान ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वह ईमानदारी से सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में काम कर रहा था।

(अखिल पाराशर)

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