टिप्पणीः पेइचिंग शिखर बैठक की अफ्रीकी विकास में तीन प्रेरणा

2018-09-06 19:09:00

वर्ष 2018 चीन अफ्रीका सहयोग मंच की पेइचिंग शिखर बैठक समाप्त हुई है। इस बैठक में पारित पेइचिंग घोषणा पत्र और भावी तीन साल की कार्रवाईयों पर चीन, अफ्रीका और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में सरगर्मी के साथ चर्चा हो रही है। इस बैठक में शरीक विभिन्न अफ्रीकी देशों के नेताओं की नज़र में चीन-अफ्रीका का विश्वसनीय साझेदार और दोस्त है। ख़ासकर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से प्रस्तुत अधिक घनिष्ठता से चीन अफ्रीका के साझे भविष्य का निर्माण करने की नई अवधारणा और कदम अफ्रीका की शांति ,स्थिरता और निरंतर विकास पर दूरगामी प्रभाव डालेंगे।

इस शिखर बैठक में चीन ने भावी तीन साल में व्यवसाय, संपर्क, व्यापारिक सलरीकरण, हरित विकास, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक मेलजोल, शांति और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना पेश की। ये कार्रवाईयां निसंदेह अफ्रीका के नये विकास में बड़ी प्रेरणाएं डालेंगी।

पहला, ये आठ बड़ी कार्रवाईयां अफ्रीकी ज़रूरतों से मेल खाती हैं और अफ्रीका का विकास लक्ष्य पूरा करने में सहायता करेंगी। अफ्रीका के विकास के लिए वर्तमान में तीन बड़ी बाधाएं हैं यानी बुनियादी संस्थापन का पिछड़ापन, मानव संसाधन का अभाव और पूंजी की किल्लत। चीन की योजना से अफ्रीका को विकास की बाधाएं दूर करने में मदद मिलेगी।

दूसरा, इन कार्रवाईयों से अफ्रीका के विकास के भविष्य पर अफ्रीकियों का हौसला बुलंद होगा। वर्ष 2000 में चीन अफ्रीका सहयोग मंच की स्थापना के बाद चीन ने न सिर्फ अफ्रीका के लिए बाजार, पूंजी ,तकनीक लाया ,बल्कि विकास का अनुभव भी लाया। इन सबने अफ्रीकी देशों को अपनी अपनी राष्ट्रीय स्थिति से मेल खाने वाला विकास मॉडल ढूंढने का विश्वास दिलाया।

तीसरा ,अफ्रीका के प्रति पूरे विश्व की मान्यता बढ़ रही है। पूर्वी ब्रिटिश विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा था कि तेज़ विकसित हो रहे चीन अफ्रीका संबंधों से हमें पता चला कि अफ्रीका एक विशाल बाज़ार है। रवांडा के राष्ट्रपति सेलेसे ने बताया कि चीन अफ्रीका सहयोग से अफ्रीका में कायापलट हुआ है और विश्व में अफ्रीका का स्थान भी बदला गया है।

(वेइतुंग)

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