टिप्पणीः एकपक्षवाद पर बहुपक्षवाद का प्रहार

2018-09-28 17:02:01

हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की 73वीं महासभा का माहौल बहुत गर्म है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका की प्राथमिकता की अवधारणा को बढ़ावा दिया है और वैश्विकता का विरोध किया। उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और महासभा के अधिकांश उपस्थितों ने बहुपक्षवाद की रक्षा करने पर ज़ोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान महासभा आयोजित होने के समय एकपक्षवाद और संरक्षणवाद बढ़ रहा है, जिससे संयुक्त राष्ट्र से केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ा है, विश्व आर्थिक बहाली और विकास की अस्थिरता और अनिश्चितता भी बढ़ रही है। गुटेरेस ने कहा कि इस समय मानवता को बहुपक्षवाद की आवश्यकता महसूस कराने का महत्वपूर्ण समय है। इसलिए वर्तमान महासभा का प्रमुख मुद्दा सब लोगों से संबंधित है:वैश्विक नेतृत्व और जिम्मेदारी साझा करने से शांति, समानता और अनवरत समाज का निर्माण करो। उम्मीद है कि महासभा में भाग लेने वाले विभिन्न देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों को इस दृष्टि से अपने अपने सुझाव और राय पेश करना चाहिए।

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले वर्ष की तरह संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद लागू की गई अमेरिका की प्राथमिकता नीति का बचाव किया, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय आदि बहुपक्षीय व्यवस्थाओं और ईरान के परमाणु समझौते की आलोचना की, ईरान, वेनेजुएला और जर्मनी पर आरोप भी लगाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से अमेरिका का वैश्विकता विरोधी विचार पेश किया। अमेरिकी मीडिया के अनुसार कई देशों के प्रतिनिधियों ने ट्रम्प के भाषण की आलोचन की।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि दुनिया के सामने गंभीर चुनौतियों की स्थिति में सामान्य ज्ञान आधारित सामूहिक कार्रवाई एकमात्र रास्ता है। फ्रांस के राष्ट्रपति ने विभिन्न देशों से शक्ति के नियम से इनकार करने की अपील की। यूरोपीय संघ ने यह घोषणा की कि ईरान के साथ लगातार व्यापारिक आवाजाही की जाएगी और नई भुगतान व्यवस्था की स्थापना की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र बहुपक्षवाद का अभ्यास करने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है, न कि एकतरफावाद का "शो"। बल राजनीति अभी भी दुनिया में मौजूद है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को और अधिकत्तर न्यायपूर्ण और उचित दिशा में आगे बढ़ाना, सहयोग करना और समान जीत पाना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मुख्य धारा है। संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान महासभा में भयंकर टकराव से लोगों की यह इच्छा, युग की प्रवृत्ति दिखाई गई है।

(वनिता)

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