चीनी दिलों में बसे हैं भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

2018-10-01 19:06:01

भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सम्मान न केवल पूरे भारत में किया जाता है बल्कि दुनिया के अनेक देशों में भी किया जाता है। गांधी जी जो भी करते थे वो सबके हित के लिए करते थे और उनके काम करने के तरीकों में उनके बहुत से सिद्धांत शामिल थे। गांधी जी दुनिया के कई बड़े हिस्सों में गए लेकिन वे कभी चीन नही गए। हालांकि वे चीन जाने की इच्छा रखते थे लेकिन उन दिनों वहां के हालात ने उन्हें रोक दिया।

आज के समय में, चीनी युवाओं को चीनी भाषा में उपलब्ध गांधी साहित्य में विशेष दिलचस्पी है। चीनी लोग महात्मा गांधी जी के बारे में जानते हैं और उनके प्रति श्रृद्धा का भाव रखते हैं, क्योंकि वे उनके बारे में पढ़ते हैं। चीन में उन पर सैकड़ों किताबें लिखी गईं हैं। मौजूदा समय में चीन में गांधी जी को पढ़ने और गांधीवाद पर अध्ययन करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। काफी संख्या में चीनी लोग उनके जीवन जीने के तरीकों से प्रभावित हैं।

आज गांधी चीन की सभी इतिहास की किताबों में पढ़ाए जाते हैं। चीन की आर्थिक राजधानी शहर शांगहाई की फुतान विश्वविद्यालय ने भारत सरकार को लिखा था कि वो उनके साथ मिलकर विश्वविद्यालय में एक गांधी अध्ययन केंद्र खोलना चाहते हैं ताकि उनके छात्रों को महात्मा गांधी और भारत के बारे में और अधिक जानकारी मिल सके।

साल 2015 में जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में चीन का पहला दौरा किया तब उन्होंने फुतान विश्वविद्यालय में गांधी अध्ययन केंद्र का उद्घाटन किया। हालांकि, यह पहला मौका था जब चीन में गांधी अध्ययन के प्रति एक समर्पित केंद्र स्थापित किया गया।

चीनी दिलों में कैसे बसे गांधी जी

पूरे चीन में गांधी जी की एकमात्र मूर्ति राजधानी पेइचिंग के छाओयांग पार्क में लगी है, जहां सामने एक मानव-निर्मित तालाब है और वो मार्क्स, इग्नेसी जान पेडेरेव्स्की और ह्रिस्टो बोटेव जैसी शख़्सियतों से घिरे हुए हैं। साल 1920 के समय जब महात्मा गांधी जी का प्रभाव भारत के कोने-कोने में फैल रहा था तब चीन एक ऐसा देश था जब वहां के कई लोग प्रेरणा के लिए उनकी ओर देख रहे थे। उनके मन में एक ही सवाल था कि क्या सत्याग्रह और अहिंसा का पालन करने से उनके देश का भला होगा? उन दिनों भारत में जहां ब्रिटिश राज था वहां चीन में ब्रिटेन के साथ-साथ अमरीका और फ्रांस जैसे बड़े देशों की ताकत का जोर था। इसके साथ ही चीन में अलग-अलग गुटों में लड़ाई के कारण गृह युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी।

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