चीनी दिलों में बसे हैं भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

2018-10-01 19:06:01

गांधी जी समकालिन भारत के महान क्रान्तिकारी नेता थे। वे एक असाधारण सामाजिक और धार्मिक सुधारक भी थे। वे आजीवन भारतीय राष्ट्रीय स्वाधीनता के लिए संघर्ष करते रहे। अंत में उन्होंने अपने प्राण भी न्योछावर कर दिये। उनकी भावना अभी भी चीनी दिलों में जीवित है। चीनी लोग मानते हैं कि गांधी जी चीन को प्यार करते थे और उनके देश के विकास पर भी ध्यान देते थे। महात्मा गांधी चीनी जनता द्वारा चलाये जा रहे जापान-विरोधी मुद्दे के प्रति सैंद्धान्तिक और नैतिक तौर पर समर्थन करते थे। आज चीनी जनता भी उन्हें भारतीय जनता के समान याद करती है।

चीनी बुद्धिजीवी वर्ग बड़ी दिलचस्पी के साथ अपने देश की जनता को गांधी जी के बारे बताता रहा है। चीनी क्रान्ति के पूर्व 20 सालों में गांधी जी की आत्मकथा, उनके विचार एवं कार्यों से संबंधित लगभग 30 प्रकार की पुस्तकें चीनी भाषा में प्रकाशित और प्रचलित हुई थीं। औसतन 1 साल में एक से अधिक प्रकार की पुस्तकें प्रकाशित हुईं। इन पुस्तकों में सिर्फ गांधी जी की आत्मकथा के अनुवाद ही 4 प्रकार के थे। इनके अलावा गांधी जी की प्रतिनिधि-रचना- ‘भारतीय स्वायत्त’ इत्यादि चीनी भाषा में अनुवादित हुई। चीन की एक महत्वपूर्ण पत्रिका ‘पूर्वी पत्रिका’ में गांधी जी और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित लेख जैसे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के नेता- गांधी, गांधीवाद क्या है, गांधी की संक्षिप्त आत्मकथा, भारत की अंहिसक क्रांति, भारतीय स्वराज्य आन्दोलन आदि विषयों पर लगभग 70 लेख प्रकाशित हुए।

इस पत्रिका ने “गांधी जी और नया भारत” शीर्षक से एक विशेषांक भी प्रकाशित किया था। इसमें बहुत लेख छपे। चीन की मुक्ति के बाद तो गांधी जी से संबंधित लेख और पुस्तकें तो पहले से और अधिक प्रकाशित हुईं। यहां तक कि कुछ विश्वविद्यालयों में गांधी जी के बारे में विशेष अध्ययन भी करवाया जाने लगा। इससे जाहिर होता है कि गांधी और गांधीवाद चीन में पर्याप्त चर्चा के विषय रहे और चीनी चिंतन नें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

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