टिप्पणीः विश्व को जहर की गोलियाँ खिला रहा है अमेरिका

2018-10-15 16:02:01

इस साल के जुलाई माह में अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्रालय के नाम को बहुपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्रालय में बदल दिया, जिस का मकसद और ज्यादा देशों के साथ व्यापारिक संबंधों का विकास करना है, जबकि अमेरिका पर अति निर्भरता कम करना है। कनाडा के लिए बहुपक्षीयवाद के निशाने पर चीन का बाजार है।

लेकिन हाल में संपन्न अमेरिका-मैक्सिको-कनाडा समझौते(यूएसएमसीए) ने अमेरिकी बाजार पर कनाडा की निर्भरता कम नहीं की है। इसके विपरीत कनाडा अन्य देशों के साथ व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर करने की स्वतंत्रता भी खो चुका है। इस समझौते की 32वीं धारा के मुताबिक यदि कोई एक देश गैर बाजार आर्थिक देश के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करता है, तो अन्य देश छह महीने में त्रिपक्षीय व्यापारिक समझौते से हट सकते हैं। लोकमत का मानना है कि यह धारा खास तौर पर चीन के खिलाफ है। ब्रिटिश फाइनेंशियल टाइम्स की टिप्पणी में कहा गया कि वास्तव में समझौते में अनेक धाराएं बिल्कुल चीन को नियंत्रित करती हैं, साथ ही कनाडा और मैक्सिको को भी इसी तरह करना पड़ेगा।

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री रोस ने 32वीं धारा को जहर की गोली धारा माना। साथ ही अमेरिका इस धारा को जापान, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन आदि देशों के साथ हस्ताक्षरित होने वाले स्वतंत्र व्यापार समझौते में भी कॉपी करना चाहता है। तो क्या अमेरिका विश्व में एक खास व्यापार तंत्र की स्थापना कर चीन को अलग कर सकता है? जवाब नहीं है।

पहला, अमेरिका का यह समझौता स्वतंत्र नहीं है और अन्यायपूर्ण है। वाशिंगटन ने शक्तिशाली व्यापारिक देश की हैसियत से कनाडा और मैक्सिको की प्रभुसत्ता व स्वतंत्रता को छीना है। इस नये समझौते की चर्चा में कनाडा वाणिज्य मंडल के अध्यक्ष ने कहा कि कनाडा को बहुपक्षीय बाजार का विस्तार करना चाहिए, ताकि कनाडा किसी एक व्यापारिक बाजार पर अति निर्भर न रहे।

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