टिप्पणी:एशिया व यूरोप क्यों नजदीक आए ?

2018-10-20 17:32:01

हाल ही में डच बैटरी निर्माता लिथिउम वर्क्स बीवी ने यह फैसला किया कि वह 1 अरब 85 करोड़ डॉलर पूंजी लगाकर चीन में नयी ऊर्जा वाली लिथियम बैटरी के सुपर कार्यक्रम और चीनी अध्ययन आधार की स्थापना करेगा। यह न सिर्फ़ चीन में बाजार को और खुला करने की स्थिति है, बल्कि यूरोप-चीन संबंधों को और घनिष्ठ बनाने के लिये यूरोप का नया कदम भी है।

फिर एशिया व यूरोप के 51 देशों तथा यूरोपीय संघ व आसियान के नेताओं ने 19 अक्तूबर को दो दिवसीय एशिया-यूरोप शिखर सम्मेलन के आयोजन के बाद बयान जारी कर खुले व मुक्त व्यापार का समर्थन देने और सभी तरीके वाले व्यापार संरक्षणवाद का विरोध करने का वचन भी दिया। साथ ही उन्होंने ईरान के नाभिकीय समझौते का समर्थन देने और वैश्विक जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की बात कही।

क्यों एशिया व यूरोप घनिष्ठ होकर मिलते जुलते हैं?पहले, अमेरिका द्वारा की गयी व्यापार संरक्षणवाद कार्रवाई ने विश्व को बड़ी चुनौती दी है। उसने न सिर्फ़ चीन के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ़ बढ़ाया, बल्कि यूरोपीय संघ पर आरोप भी लगाया। दूसरे, अमेरिका के व्यापार संरक्षणवाद का विरोध करने के अलावा एशिया व यूरोप के देश दोनों महाद्वीपों के आपसी संपर्क पर ध्यान देते हैं। तीसरे, महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर एशिया व यूरोप के देशों की दृष्टि व नीति बराबर हैं। इस में विश्व का जलवायु परिवर्तन व ईरान का नाभिकीय मामला आदि शामिल हुए हैं।

चंद्रिमा

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