टिप्पणी : चीन और जापान के बीच व्यवहारिक सहयोग के कुंजीभूत बिंदु

2018-10-27 16:32:01

25 से 27 अक्तूबर को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने चीन की यात्रा की। यह लगातार 7 वर्षों बाद जापान के प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा है, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग और जापानी नेताओं के नेतृत्व में द्विपक्षीय संबंध सामान्य रास्ते पर वापस लौटे हैं और नई शुरूआत में आगे बढ़ाया जाएगा।

चीन और जापान द्वारा शिंजो अबे की चीन यात्रा पर किए गए इंतजाम को देखा जाए, तो भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यवहारिक सहयोग तीन प्रमुख बिंदुओं पर निर्भर करता है।

पहला, दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास के आधार को मज़बूत किया जाए। 25 तारीख को दोपहर बाद चीन और जापान के प्रधानमंत्रियों ने समान रूप से दोनों देशों के बीच शांति और मित्रता की संधि संपन्न की 40वीं वर्षगांठ के समारोह में भाग लिया और भाषण दिया। देशों के बीच संबंधों के विकास का आधार है एक दूसरे का विश्वास। इतिहास में युद्ध के दर्द और दुख का अनुभव करने वाले चीन और जापान के लिए यह विशेष रूप से सच है। 26 तारीख को दोपहर के बाद चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग ने शिंजो अबे के साथ मुलाकात में ज़ोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों को और गहन रूप से रणनीतिक संपर्क करना चाहिए, विभिन्न स्तर पर दोनों देशों के बीच वार्ता की व्यवस्था की भूमिका निभानी चाहिए, ताकि एक दूसरे के बीच विश्वास को आगे बढ़ाया जा सके।

दूसरा, दोनों पक्षों के बीच आपसी लाभ और समान जीत वाले सहयोग के क्षेत्र का विस्तार किया जाए। इस वर्ष की मई में चीनी प्रधान मंत्री ली खछ्यांग ने जापान की यात्रा करने के दौरान जापान के साथ तीसरे पक्ष के बाज़ार के सहयोग करने पर सहमति बनाई थी। शिंजो अबे की चीन यात्रा के दौरान पहले चीन और जापान के बीच पहला तीसरे बाजार सहयोग मंच पेइचिंग में आयोजित हुआ। तीरसरे बाजार सहयोग के अलावा दोनों देश सहयोग के नए मंच का विकास करेंगे।

तीसरा, दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आगे बढ़ाया जाए। चीन और जापान के बीच घनिष्ठ आर्थिक और व्यापारिक सहयोग की तुलना से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की बड़ी संभावना है। जनता की राय में सुधार आना दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने का केंद्र है।

इससे देखा जाए, अगर भविष्य में उक्त तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया जाए, तो विश्व के दूसरे और तीसरे बड़े आर्थिक समुदाय के रूप में चीन और जापान विश्व के विकास में एक अनिवार्य शक्ति बनेंगे।

(वनिता)

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