टिप्पणीः चीन और विश्व को समृद्धि की ओर जाने वाले पुल का सहनिर्माण करना चाहिए

2018-11-07 17:09:01

इधर के दिनों में चीन ने निसंदेह विश्व मीडिया की नजर खींची है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 5 नवम्बर को पहले चीन अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सपो में थीम भाषण दिया और अभिनव और समावेशी खुली विश्व अर्थव्यवस्था का सहनिर्माण करने की अपील की। चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने 6 नवम्बर को विश्व बैंक, आईएमएफ और विश्व व्यापार संगठन आदि छह प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व वित्तीय संस्था के अधिकारियों के साथ 1 6 वार्तालाप का आयोजन किया और खुलेपन के सहयोग में चीन और दुनिया द्वारा साझी जीत की खोज पर विचार विमर्श किया। उसी दिन चीनी उप राष्ट्रपति वांग छीशान ने सिंगापुर के अभिनव आर्थिक मंच में कहा कि चीन खुलेपन की बुनियादी नीति लागू करता रहेगा और विश्व के विभिन्न देशों के साथ आर्थिक भूमंडलीकरण को और खुला, समावेशी, संतुलन और साझी जीत की ओर विकसित करने को बढ़ाएगा।

इस के साथ साथ चीनी अंतर्राष्ट्रीय उड्डयन व अंतरिक्ष एक्सपो, 5वां विश्व इंटरनेट सम्मेलन भी क्रमशः चीन में आयोजित हो रहे हैं। चीन विश्व के समान विकास करने का संकल्प दिखाना चाहता है।

खुलापन तत्कालीन चीन का स्पष्ट चिन्ह है। चीन निरंतर खुलेपन का विस्तार करता रहा है। चीन ने खुद का विकास करने के साथ साथ दुनिया को भी लाभ दिया है। चीन सरकार के अनुमान के मुताबिक आगामी 15 सालों में चीन के आयात उत्पादों व सेवा का मूल्य क्रमशः 300 खरब यूएस डॉलर और 100 खरब यूएस डॉलर तक पहुंचेगा। चीन उच्च गुणवत्ता वाले विकास को और बड़ा महत्व देगा। चीन उपभोग का विस्तार करने और सेवा उद्योग का विकास करने से जनता की उच्च गुणवत्ता वाले जीवन की मांग को और अच्छी तरह पूरा करेगा और आर्थिक पुनःसंतुलन को आगे बढ़ाएगा।

आईएमएफ की निदेशक क्रिस्टीन लगार्द का मानना है कि चीन समृद्धि की ओर जाने वाले पुल का निर्माण कर रहा है। इस साल की पहली तीन तिमाहियों में चीन के जीडीपी के प्रति उपभोग की योगदान दर 78 प्रतिशत तक पहुंची थी, जबकि 5 सालों से पहले सिर्फ 50 प्रतिशत थी। इस समृद्ध पुल के निर्माण के लिए चीनी लोगों की ही नहीं पूरी दुनिया की आवश्यक्ता भी है।

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