टिपण्णीः चीन-लैटिन अमेरिका साझे भाग्य वाले समुदाय का मौका और चुनौती

2018-11-26 15:31:00

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 27 नवम्बर से स्पेन, अर्जेंटीना, पनामा और पुर्तगाल की राजकीय यात्रा करेंगे और ब्यूनस आयर्स में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। हालिया अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में विविधतापूर्ण अनिश्चितताएं और अस्थिरताओं की पृष्ठभूमि में चीन, अर्जेंटीना और पनामा समेत लैटिन अमेरिकी देश समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, साथ ही उनके पास साझे भाग्य वाले समुदाय का विकास करने के ज्यादा मौके भी हैं।

चीन और लैटिन अमेरिकी देश बहुत दूर हैं, वे सब नवोदित आर्थिक इकाईयां और विकासशील देश हैं। साथ ही वे विश्व शांति और विकास की रक्षा करने की अहम शक्ति भी हैं। लम्बे अरसे से दोनों पक्षों ने खुद के यथार्थ विकास वाले रास्ते की खोज करने की कोशिश की और उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

इधर के कई सालों में चीनी नेताओं ने चीन-लैटिन अमेरिका संबंध और विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग पर सिलसिलेवार अहम आह्वान और कदम पेश किये। वे आपसी विश्वास वाले साझे भाग्य वाले समुदाय की रचना में जुटे रहते हैं। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने तीन बार लैटिन अमेरिका की यात्रा की थी। चीन-लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों का समुदाय मंच चीन-लैटिन अमेरिका सहयोग का मुख्य माध्यम बन चुका है। इस बार शी चिनफिंग की चौथी लैटिन अमेरिका यात्रा होगी, जो चीन-लैटिन अमेरिकी संबंधों के विकास में नयी जीवित शक्ति और प्रेरणा शक्ति डालेगी और दोनों के बीच अंतर्राष्ट्रीय प्रशासन और सहयोग को मज़बूत करने के लिए तीन अवसर भी देगी।

चीन और लैटिन अमेरिका को सलाह मश्विरे और सहयोग को मज़बूत कर प्रभुत्ववादी, एकतरफावादी और संरक्षणवाद का समान रूप से विरोध करना चाहिए। इधर के वर्षों में चीन-लैटिन अमेरिका की व्यापारिक रकम करीब 2.5 खरब अमेरिकी डॉलर है, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का एक अहम गठित भाग है। चीन और लैटिन अमेरिका वैश्विक बहुपक्षीय व्यापारी तंत्र के भागीदारी और लाभार्थी हैं। इसलिए दोनों को विश्व व्यापार संगठन समेत बहुपक्षीय तंत्रों के अंतर्गत व्यापारी संरक्षणवादी का विरोध करना चाहिए, ताकि यथार्थ कार्यवाइयों से स्वतंत्र व्यापार की रक्षा कर सके।

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