भावी तीन महीने चीन और अमेरिका दोनों के लिए कुंजीभूत है

2018-12-04 11:31:00

1 दिसंबर को चीन और अमेरिका के राष्ट्रपतियों ने अर्जेंटीना में भेंटवार्ता की और दोनों ने अस्थायी तौर पर टैरिफ अपग्रेड को बंद करने का फैसला किया। दोनों पक्षों के बीच भावी 90 दिनों के भीतर वार्ता की जाएगी ताकि व्यापार युद्ध को समाप्त किया जाए। सहमति संपन्न न होने की स्थिति में दोनों के बीच व्यापार युद्ध का फिर से विस्तार होगा। दोनों राष्ट्रपतियों ने व्यापार संघर्ष पर लगाम कसने के लिए कदम उठाया और व्यापारिक युद्ध बंद किया। यह बिल्कुल सकारात्मक कदम है। पर भावी तीन महीनों में दोनों पक्षों के वार्ताकारों को मेहनत से कठोर वार्ता करनी होगी।

बीते आठ महीनों के व्यापार युद्ध के जरिये चीन और अमेरिका दोनों पक्षों ने भारी कीमत चुकायी है। तथ्यों से यह जाहिर है कि व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक विगत अक्तूबर में अमेरिका में माल का व्यापार घाटा 77.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिससे अमेरिकी सरकार पर भी भारी दबाव पड़ा है। व्यापार युद्ध छेड़ने से अमेरिका के सामने आर्थिक खतरे का विस्तार हुआ है। इसलिए व्यापार संघर्ष को“ठहराव”देना दोनों देशों के लिए बुद्धिमान और फायदेमंद है। नहीं तो अगर चीन और अमेरिका के बीच नये दौर का व्यापार युद्ध पैदा हुआ, तो दोनों देशों और विश्व को और अधिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिका ने चीन के साथ वार्ता करने के लिए बौद्धिक संपदा संरक्षण, तकनीकी सहयोग, बाजार प्रवेश और गैर-टैरिफ बाधाएं जैसी संरचनात्मक सवाल पेश किये। इनके प्रति चीन का रुख है, यानी कि जो चीन के रुपांतर और खुलेपन की दिशा के अनुकूल है, उन्हें वार्ता के प्रमुख विषयों में शामिल किया जाएगा। साथ ही चीन ने भी अपनी चिन्ताएं प्रकट की हैं। चीन कोई व्यापार युद्ध नहीं लड़ना चाहता है। लेकिन चीन को अपने केंद्रीय हितों और जनता के मूल हितों की रक्षा करने के लिए मजबूरन व्यापार युद्ध का सामना करना पड़ेगा।

भावी तीन महीनों में चीन पहले की ही तरह दोनों देशों के समान हितों और विश्व व्यापार व्यवस्था की समग्र स्थितियों के मुताबिक टैरिफ रद्द करने का लक्ष्य साकार करने की कोशिश करेगा। लेकिन चीन वार्ता के परीणाम के प्रति ज्यादा आशावादी नहीं रहेगा, और न ही अंधाधुंध तौर पर निराशावादी रहेगा। चीन और अधिक उच्च स्तर पर रूपांतर और खुलापन अपनाएगा। अगर चीन और अमेरिका समानता और एक दूसरे का समादर करने के आधार पर वार्ता करेंगे और आपस में मतभेदों को दूर करेंगे, तब दोनों पक्षों के बीच समस्याओं को दूर किया जा सकेगा और उभय जीत जाहिर हो सकेगी।

( हूमिन )

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