टिप्पणीः चीनी बौद्धिक संपदा अधिकार सुरक्षा में और एक मील का पत्थर

2018-12-08 15:30:00

3 दिसंबर को चीन के प्रमुख न्यायाधीश और सर्वोच्च जन न्यायालय के अध्यक्ष चो छांग ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलायी ,जिसमें सर्वोच्च जन न्यायालय के बौद्धिक संपदा अधिकार सुरक्षा अदालत से जुड़ी कुछ समस्याओं के प्रति कायदों पर विचार विमर्श कर उनको पारित किया गया। भविष्य में स्थापित होने वाले सर्वोच्च जन न्यायालय का बौद्धिक संपदा अधिकार अदालत देश में ऐसे पेटेंट से जुड़े मामलों की अपील की सुनवाई करेगा, जो पेशेवर तकनीकों की ऊंची मांग करते हैं। यह चीन में सृजन को प्रेरणा देने और बौद्धिक संपदा अधिकार की सुरक्षा मज़बूत बनाने में और एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

विश्लेषकों के विचार में सर्वोच्च न्यायालय में बौद्धिक संपदा अधिकार अदालत की स्थापना से जाहिर है कि चीन बौद्धिक संपदा अधिकार मामले के प्रति पेशेवर सुनवाई व्यवस्था संपूर्ण बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि वैज्ञानिक और तकनीकी सृजन की बेहतर सुरक्षा की जाए। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने चीन का बौद्धिक संपदा अधिकार सुरक्षा का संकल्प भी दर्शाया गया है।

इससे पहले चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा की स्थाई समिति ने पेटेंट से जुड़े मामलों पर मुकदमे की प्रक्रिया का फैसला पारित किया था। इसके अनुसार अगले साल की 1 जनवरी से अगर संबंधित पक्ष आविष्कार के पेटेंट, नयी किस्म वाले पेटेंट, इंटिग्रेटेड सर्किट डिजाइन ,तकनीकी रहस्य, सॉफ्ट वेयर और पेशेवर तकनीक की ऊंची मांग करने वाले मुकदमों की पहली सुनवाई के फैसले को अस्वीकार करने की अपील करता है ,तो सर्वोच्च न्यायालय इसकी सुनवाई करेगा।

सूत्रों के अनुसार इधर कुछ सालों में चीन में बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी मुकदमे तेज़ी से बढ़ रहे हैं। वर्ष 2017 में बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े विभिन्न मामलों की संख्या 2 लाख 40 हज़ार थी, जो वर्ष 2016 से 33.5 प्रतिशत बढ़ी है। ऐसे मामलों की सुनवाई को बखूबी अंजाम देना चीन में बौद्धिक संपदा अधिकार सुरक्षा के कार्यांवयन और उस के परिणाम से प्रत्यक्ष रूप से संबंधी है।

(वेइतुंग)

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