टिप्पणी:ओपेक के तेल उत्पादन में कटौती से मध्यपूर्व में आया नया परिवर्तन

2018-12-10 18:30:03

तेल निर्यातक देश संगठन यानी ओपेक ने हाल ही में दूसरे तेल उत्पादकों के साथ आयोजित एक बैठक में वर्ष 2019 की जनवरी से प्रति दिन 12 लाख बैरल की कटौती करने का फैसला किया। ओपेक इस संख्या का दो तिहाई भाग निभाएगा, और रूस समेत दूसरे दस गैर-ओपेक देश शेष शेयर उठाएंगे।

इस समिट के आयोजन से पहले कतर के ऊर्जा मामलात राज्य मंत्री ने 3 दिसंबर को घोषित किया कि कतर वर्ष 2019 के 1 जनवरी से ओपेक से हट जाएगा। वह प्राकृतिक गैस के उत्पादन और बिक्री पर अपनी शक्ति केंद्रीत करेगा और इस का तेल उत्पादन ओपेक समझौते से सीमित नहीं रहेगा। हालांकि कतर का तेल उत्पादन इतना ज्यादा नहीं है, बल्कि उस का प्राकृतिक गैस भंडार विश्व बाजार में भारी प्रभाव डालेगा। लेकिन कतर का कहना है कि वह किसी भी राजनीतिक विचार से ओपेक में से हटने का फैसला नहीं लिया है।

उधर, सऊदी अरब ओपेक का वास्तविक नेता देश है। तेल के दामों की गिरावट के प्रति उसे चिन्ता है, और इसीलिये उस ने ओपेक के उत्पादन कटौती पर जोर देने का प्रयास किया है। लेकिन कतर और सऊदी अरब आदि के साथ मुठभेड़ के पीछे आधुनिक रुपांतर, सलाफिस्ट संगठन का समर्थन देने आदि के विषयों पर मतभेद भी मौजूद हैं। जब सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान अल सौउद के सत्ता में आने के बाद कतर और सऊदी अरब के बीच अंतर्विरोध भीषण बन गया है। अब कतर तुर्की, इरान, ओमान और कुवैत आदि देशों की ओर नजदीकी बढ़ा रहा है।

भविष्य में मध्य पूर्व क्षेत्रों में नयी स्थिति जन्म लेगी यानी कि एक तरफ सऊदी अरब, मिस्र, अरब संयुक्त अमीरात साथ साथ रहेंगे, और दूसरी तरफ इरान भी इराक, सीरिया, लेबनान और हुथी बल आदि के साथ संयुक्त कार्यवाही करेगा। इजराइल भी खाड़ी सहयोग संगठन के सदस्यों के साथ संबंधों का सुधार करेगा ताकि अपने लिए सही रणनीतिक वातावरण तैयार कर सके।

( हूमिन )

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