मैक्रोन की प्रतिक्रिया से उन्हें वर्तमान संकट में गुजरने में मदद देगी?

2018-12-11 19:00:06

फ्रांस में "पीले वेस्ट" विरोध ("Yellow vest" protest) के कई चरणों के बाद राष्ट्रपति एमैनुएल मैकरोन ने 10 दिसंबर को अपने टीवी व्याख्यान में कहा कि देश आर्थिक और सामाजिक आपातकाल में दाखिल हो गया है और उन्होंने तीन बातें कही- पहला, आम लोगों के दुःख को समझा जाएगा, आने वाली जनवरी से निम्नतम वेतन में सौ यूरो की वृद्धि दी जाएगी, ओवरटाइम आय पर टैरिफ नहीं लगाया जाएगा और 2,000 यूरो से कम मासिक आय के सेवानिवृत्त लोगों को विशेष कल्याण दिया जाएगा। दूसरा, आतंकवादी कार्यवाही करने वालों को सख्त कानूनों से निपटा जाएगा, ताकि समाज की शांति और गणराज्य व्यवस्था की बहाली की जाए। तीसरा, मौजूदा समस्याएं अधिक तौर पर चालीस सालों की भूतपूर्व सत्ता को जिम्मेदारी उठानी है। मौजूदा सरकार विभिन्न जगतों के साथ बातचीत और संपर्क रखना जारी रखेगी।

इन मुद्दों से यह देखा जाता है कि मैक्रोन ने प्रदर्शनकारियों की अधिकांश मांगों के प्रति रियायत दी है। उनकी कोशिशों से प्रदर्शनकारियों को शांत किया जा सकेगा, फिर भी इसके अंतिम परीणाम को ग़ौर से देखा जाना होगा।

"पीले वेस्ट" विरोध में शामिल प्रदर्शनकारियों में अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे नगरों के निम्न स्तरीय लोग हैं। उन्होंने मैक्रोन सरकार की कुप्रथा की आलोचना की है और मैक्रोन से त्यागपत्र देने की मांग की। इस आन्दोलन के चलते फ्रांस के मजदूर संघ, अध्यापकों, स्थानीय अधिकारियों और यहां तक कि छात्रों ने भी मैक्रोन सरकार से भिन्न भिन्न मांगें पेश कीं। विरोधी दलों ने भी सरकार से सत्ता छिनने का मौका नहीं छोड़ा। इस स्थिति में मैक्रोन के भाषण में दी गयी जो रियायत है, व्यापक वर्गों की मांगों के लिए काफी नहीं मानी जा सकती है।

फ्रांस में लोकमतों का मानना है कि मैक्रोन के द्वारा "पीले वेस्ट" विरोध के प्रति की गयी प्रतिक्रिया का उद्देश्य, वर्तमान सामाजिक स्थितियों को शांत करने के साथ साथ अपने पाँच सालों के कार्य काल को बनाये रखना है। लेकिन उन्हों ने आम आदमियों में असंतोष पैदा होने का दोष भूतपूर्व सरकारों को लगाया है, पर अपने शासन की जिम्मेदारियों का कोई सिंहावलोकन नहीं किया। वास्तव में मैक्रोन सरकार के रुपांतर की अच्छी उम्मीद है, लेकिन इसे समाज में व्यापक समझ नहीं मिल पायी है। और जब लोगों ने इस का विरोध करना शुरू किया, तब मैक्रोन ने घमण्ड और असहनशीलता दिखाई, जिससे आम लोगों में व्यापक असंतोष पैदा हुआ। इसी वजह से इस वर्ष के गर्मी और शरद मौसम में मैक्रोन की समर्थन दर गिरती जा रही है।

यह कहा जा सकता है कि फ्रांस में सामाजिक विरोध लगातार चलता तो नहीं रहेगा, पर मैक्रोन का नाम और आम लोगों से आहवान देने की शक्ति कमजोर बनेगी। अगले साल के यूरोपीय संसद चुनाव में उन्हें राइट विंग पार्टी पुनर्वितरण राष्ट्रीय की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

( हूमिन )

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