वैश्विक समस्याओं के समाधान में चीनी सूझ-बूझ लाभदायक

2018-12-17 11:00:00

18 से 22 दिसंबर 1978 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 11वीं समिति का तीसरा पूर्णाधिवेशन पेइचिंग में आयोजित हुआ था। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन को चीन में सुधार और खुलेपन की नीति लागू करने की शुरुआत हुई थी। चालीस वर्षो में चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और 70 करोड़ से अधिक चीनियों को गरीबी से छुटकारा दिलाया है। इसके साथ चीनी विकास के अनुभव को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रशंसा मिली है। वैश्विक समस्याओं के समाधान में चीनी सूझ बूझ अपनी भूमिका निभा रहा है।

पूर्व फ्रांसीसी प्रधानमंत्री डोमिनीक दे विलेपिन के विचार में चीनी सुधार और खुलेपन की सफलता व्यावहारिकता और सहयोग से अलग नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि चीनी सफलता में दो अनुभव हैं। पहला, व्यावहारिक और कदम दर कदम दीर्घकालिक योजना से परिवर्तन आ सकेगा। दूसरा, खुलेपन और सहयोग निर्माण और विकास की कुंजी है।

पूर्व जापानी प्रधान मंत्री युकिओ हाटोयामा ने बताया कि चालीस वर्षों में चीन ने पहले समुद्र तटीय क्षेत्रों का विकास किया, फिर समग्र देश का विकास किया। यह तरीका सफल रहा। चीन के विकास के दौरान पड़ोसी देशों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। क्योंकि चीन एक विशाल बाज़ार है।

जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति एमर्सन म्नानगागवा ने इस साल दो बार चीन की यात्रा की। उनके विचार में जिम्बाब्वे को चीन जैसे साझेदार की जरूरत है ताकि उन्हें विकास को मदद मिले। उन्होंने कहा कि जिंबाब्वे को चीन के अनुभव से सीखना चाहिए।

(वेइतुंग)

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